Edited By meena, Updated: 02 May, 2026 03:00 PM

मध्य प्रदेश के बरगी डैम की वह सुहानी शाम किसी आम छुट्टी की तरह शुरू हुई थी, लेकिन कुछ ही घंटों में वह कई परिवारों के लिए ज़िंदगी का सबसे बड़ा दुःख बन गई। नर्मदा की लहरें उस दिन कुछ ज्यादा ही बेचैन थीं...
जबलपुर : मध्य प्रदेश के बरगी डैम की वह सुहानी शाम किसी आम छुट्टी की तरह शुरू हुई थी, लेकिन कुछ ही घंटों में वह कई परिवारों के लिए ज़िंदगी का सबसे बड़ा दुःख बन गई। नर्मदा की लहरें उस दिन कुछ ज्यादा ही बेचैन थीं। आसमान में घिरते काले बादल आने वाले खतरे की चेतावनी दे रहे थे, मगर किसी ने अंदाज़ा नहीं लगाया कि यह सफर इतना भारी पड़ जाएगा। और देखते ही देखते क्रूज पानी में समा गया साथ ही दिल्ली से घूमने आए मेसी परिवार की खुशियां भी अचानक मातम में बदल गईं। पूरा देश उस समय रो उठा जब एक मां का शव उसके बच्चे के साथ लिपटा मिला।
क्रूज़ पर सवार लोग हंसी-खुशी के साथ अपने परिवारों के साथ पल बिता रहे थे। बच्चों की खिलखिलाहट, बुजुर्गों की मुस्कान और युवाओं की मस्ती—सब कुछ सामान्य था। दिल्ली से आयए मेसी परिवार के सदस्य प्रदीप मेसी, उनकी पत्नी मरीना और उनका 4 साल का बेटा त्रिशान इस सफर का आनंद ले रहे थे। तभी अचानक तेज हवाओं ने रुख बदला। लहरें ऊंची होने लगीं और बारिश ने माहौल को भयावह बना दिया। कुछ ही पलों में खुशी चीख-पुकार में बदल गई। क्रूज़ डगमगाने लगा और फिर पानी में समा गया।
इस अफरातफरी के बीच मरीना अपने छोटे बेटे को सीने से लगाए रही। हर लहर के थपेड़े के साथ उसका डर बढ़ता गया, लेकिन उसकी पकड़ ढीली नहीं हुई। उसने अपने बच्चे को अपनी लाइफ जैकेट में समेट लिया, जैसे अपनी सांसों में छिपा लेना चाहती हो। उस समय उसके लिए अपनी जान से ज्यादा अहम अपने बच्चे की जिंदगी थी।
क्रूज स्टाफ ने यात्रियों को नीचे जाने और खिड़कियां बंद रखने को कहा, लेकिन कुछ ही पलों में स्थिति बेकाबू हो गई और जहाज डूब गया। बताया जाता है कि तेज लहरों के कारण क्रूज की खिड़कियां टूट गईं और पानी तेजी से अंदर भरने लगा। कुछ ही समय में पूरा जहाज पलट गया। चारों तरफ अफरा-तफरी, चीख-पुकार और अंधेरा फैल गया।
जब बचाव दल मौके पर पहुंचा, तब तक बहुत कुछ खत्म हो चुका था। पानी शांत हो गया था, लेकिन पीछे छोड़ गया था एक गहरा सन्नाटा। इसी दौरान एक तस्वीर सामने आई—मां और बेटे की, जो एक-दूसरे से ऐसे लिपटे थे मानो अब भी एक-दूसरे को छोड़ना नहीं चाहते। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।
मां भाई और नानी को खोने वाली मरीना की बेटी सिया के मुताबिक जैसे ही मैं मलबे से बाहर निकली, मैंने अपने पिता को देखा। मैंने उनका हाथ पकड़ा और कसकर पकड़ लिया। फिर हम दोनों बाहर निकले... लेकिन मुझे मेरी मां और मेरा भाई कहीं दिखाई नहीं दिए।”
थोड़ा होश संभालते हुए सिया ने बताया, “हम यहां छुट्टी मनाने आए थे। मेरे मामा के गृह प्रवेश के लिए हम यहां आए थे। मेरे नाना-नानी बहुत दिनों बाद आए थे। अगले दिन हमने घूमने जाने का फैसला किया था। लेकिन हादसे ने मेरी मां,भाई और नानी को छीन लिया।
दूसरी तरफ, अस्पताल में जब पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे गए, तो पिता प्रदीप मेसी का दर्द फूट पड़ा। वे अपने बेटे और पत्नी को देखकर बार-बार उन्हें जगाने की कोशिश करते रहे और बेसुध होकर रोते रहे। पत्नी मरीना और बेटे त्रिशान के चेहरे से कफन हटाते बाप-बेटी अपना सुध-बुध खो बैठे और पिता बार-बार अपने बेटे का ठंडा पड़ चुका हाथ थामते कहते रहे, राजा बेटा उठ जा… यूं चुप मत रह… देख पापा आए हैं, कुछ तो बोल बेटा। इस दर्दनाक दृश्य को जिसने भी देखा वो भावुक हो गया।