Edited By Devendra Singh, Updated: 05 Feb, 2022 04:31 PM

करीब 300 साल पुराने मंदिर में पहुंचकर अपनी होने वाली परीक्षा के लिए मन्नते मांगते हैं। इस मंदिर में विद्यार्थी माता सरस्वती की प्रसन्नता के लिए उनका स्याही से अभिषेक करते हैं।
उज्जैन (विशाल सिंह ठाकुर): विश्व का एक मात्र ऐसा मंदिर यहां पर बसंत पंचमी के मौके पर छात्र छात्राएं अपने भविष्य की पढ़ाई और करियर बनाने के लिए मां सरस्वती को स्याही और पेन चढ़ाते हैं। शनिवार को बंसत पंचमी पर सुबह से ही बड़ी संख्या में विध्यार्थी सिंहपुरी में चौरसिया समाज की धर्मशाला के पास माता सरस्वती के करीब 300 साल पुराने मंदिर में पहुंचकर अपनी होने वाली परीक्षा के लिए मन्नते मांगते हैं। इस मंदिर में विद्यार्थी माता सरस्वती की प्रसन्नता के लिए उनका स्याही से अभिषेक करते हैं। परीक्षा में सफलता प्राप्ति के लिए देवी को कलम, दवात भी चढ़ाई जाती है।
बसंत पंचमी पर सुबह से ही विद्यार्थी यहां माता का स्याही से अभिषेक करने पहुंचे। इसके साथ ही माता सरस्वती को पीले पुष्प अर्पित कर पूजा अर्चना की। मान्यता है कि इस मंदिर में बसंत पंचमी पर स्याही और पेन चढ़ाने से छात्र छात्राओं का भविष्य उज्जवल हो जाता है।
पाषाण की मूर्ति
पं. अनिल मोदी ने बताया कि 300 साल प्राचीन मुगल कालीन मंदिर में पाषाण की काली मूर्ति है। छात्र अच्छे नम्बरों से पास हो, उनका करियर बन जाए, ऐसी कामना लेकर स्याही चढ़ाते हैं। परीक्षा के दिनों में भी छात्र छात्राओं का तांता मंदिर में लगता है।
पीले पुष्प का भी महत्व
इस मंदिर में स्याही और कलम के साथ साथ विद्यार्थी पीले फूल भी चढ़ाते हैं। जिसमें सरसों के फूल का खासा महत्व है। सरस्वती का ये मंदिर सिहंपुरी के सकरे मार्ग में स्थित है। बेशकीमती पाषाण की मूर्ति बहुत छोटे से मंदिर में वीराजीत है। बसंत पंचमी पर्व पर सुबह से ही बच्चों के साथ साथ पुरुष, महिला की भीड़ जुटना शुरू हो जाती है।