Edited By Himansh sharma, Updated: 26 Jul, 2026 01:13 PM

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
इंदौर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इस बीच मध्यप्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक अवसरवाद करार देते हुए कहा कि जिस आंदोलन को लेकर कांग्रेस सड़कों पर उतर रही है, उससे उसका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। उनका आरोप था कि कांग्रेस केवल राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से इस पूरे घटनाक्रम को भुनाने की कोशिश कर रही है।
विजयवर्गीय ने कहा कि जिस छात्र आंदोलन की चर्चा हो रही है, वह छात्रों द्वारा शुरू किया गया था और उसी दौरान पुलिस कार्रवाई भी हुई। उनके अनुसार कांग्रेस बाद में इस मुद्दे में शामिल हुई और इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष लंबे समय से किसी बड़े मुद्दे की तलाश में था और उसे इस घटनाक्रम में राजनीति का अवसर दिखाई दिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि किसी भी टिप्पणी से पहले संघ के योगदान को समझना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि देश के सामाजिक और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाने में आरएसएस के स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोलते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि वे उन्हें विद्यार्थी परिषद के समय से जानते हैं और हमेशा एक अनुशासित एवं समर्पित कार्यकर्ता के रूप में देखा है। उनके मुताबिक आंदोलन की शुरुआत होते ही धर्मेंद्र प्रधान ने पार्टी नेतृत्व के सामने स्वयं इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी और बाद में संगठन के सामूहिक निर्णय के अनुरूप उन्होंने पद छोड़ दिया। विजयवर्गीय ने इसे संगठन के प्रति समर्पण और अनुशासन का उदाहरण बताया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उन कथित विदेशी ताकतों की रणनीति विफल हो गई, जो भारत में अस्थिरता और हिंसा का माहौल बनाना चाहती थीं। विजयवर्गीय के अनुसार कुछ शक्तियां देश में बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी परिस्थितियां उत्पन्न करने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन उनका यह प्रयास सफल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के फैसले ने ऐसी सभी कोशिशों पर विराम लगा दिया और इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं।
विजयवर्गीय के इन बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज होती जा रही है..