मोहन कैबिनेट के इस फैसले के खिलाफ राष्ट्रपति के पास पहुंची कांग्रेस, मंत्रिमंडल को बर्खास्त करने की मांग की

Edited By meena, Updated: 26 Aug, 2026 04:05 PM

congress approaches the president against this decision of the mohan cabinet

कांग्रेस ने भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में बुधवार को मंत्री विजय शाह के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अभियोजन की मंजूरी नहीं दिए जाने...

भोपाल : कांग्रेस ने भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में बुधवार को मंत्री विजय शाह के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अभियोजन की मंजूरी नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित पूरे मंत्रिमंडल को बर्खास्त करने की मांग की। कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखे एक पत्र में कहा कि राज्य सरकार द्वारा विजय शाह के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने का निर्णय एक 'बड़बोले मंत्री' को राजनीतिक संरक्षण देने के साथ उस व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है, जिसमें सत्ता अपने राजनीतिक व्यक्ति को जवाबदेही से बचाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया के सामने दीवार बनकर खड़ी हो रही है। उन्होंने कहा, ''उच्चतम न्यायालय की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अभियोजन की स्वीकृति की मांग की है। ऐसे में सरकार का रुख देश के सामने एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करता है कि क्या सत्ता में बैठे व्यक्ति कानून से ऊपर हैं।''
पटवारी ने यह पत्र मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के एक दिन बाद लिखा, जिसमें आदिम जाति कल्याण मंत्री शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं आया। मंत्रिमंडल के बाद हुए संवाददाता सम्मेलन में जब लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह से इस विषय में सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव मंत्रिमंडल में नहीं आया। बाद में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने भी इसकी पुष्टि की। सूत्रों की मानें तो मंगलवार को कैबिनेट मीटिंग के बाद अधिकारियों को बैठक से बाहर भेज दिया गया इसके बाद कुछ बड़े अधिकारियों और मंत्रियों की मौजूदगी में फैसला लिया गया कि शाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस चलाने की मंजूरी नहीं दी जाएगी।
दरअसल, पिछले दिनों उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि वह दो सप्ताह के भीतर शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में अभियोजन की स्वीकृति पर निर्णय ले। इस मामले में उच्चतम न्यायालय में अगली सुनवाई 31 अगस्त को होने वाली है। ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि मंत्रिमंडल की मंगलवार की बैठक में सरकार इस संबंध में कोई निर्णय ले सकती है। लेकिन सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों ने ही पुष्टि की कि इस संबंध में कोई प्रस्ताव मंत्रिमंडल में नहीं आया।

पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा कि मध्यप्रदेश के राजनीतिक इतिहास का यह एक 'अत्यंत शर्मनाक अध्याय' है, जहां सवाल अब केवल विजय शाह के आचरण का नहीं, मुख्यमंत्री और पूरे मंत्रिमंडल की संवैधानिक एवं नैतिक जवाबदेही का है। उन्होंने कहा, ''इसलिए मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री सहित अब पूरे मंत्रिमंडल को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए।'' पटवारी ने कहा कि राष्ट्रपति सेना एवं संविधान की सर्वोच्च संरक्षक हैं और देश की जनता उनसे अपेक्षा करती है कि संविधान की मर्यादा, न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और भारतीय सेना के सम्मान की रक्षा के लिए वह अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करेंगी। उन्होंने इस मामले में राष्ट्रपति से तत्काल दखल का अनुरोध करते हुए उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस पूरे प्रकरण पर देश के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे तथा किसी भी राजनीतिक प्रभाव को न्यायिक प्रक्रिया में बाधा नहीं बनने देंगे।

ज्ञात हो कि शाह से जुड़ा यह पूरा मामला मई 2025 का है जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर के आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इस ऑपरेशन की जानकारी मीडिया को देने वाली सैन्य अधिकारियों की टीम में कर्नल सोफिया कुरैशी भी शामिल थीं। शाह ने इंदौर के निकट महू के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में कुरैशी को लेकर ऐसी टिप्पणी की थी, जिसे उनके धर्म और पहलगाम हमले के आतंकियों के समुदाय से जोड़कर देखा गया। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने उनकी टिप्पणी का स्वत: संज्ञान लिया और शाह की टिप्पणी को बेहद आपत्तिजनक मानते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद शाह ने इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने शाह के बयानों की निंदा करते हुए इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी की रिपोर्ट अदालत के सामने प्रस्तुत होने के बाद उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि वह शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में अभियोजन की स्वीकृति पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय ले। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि न्यायालय द्वारा गठित एसआईटी अपनी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर चुका है, लेकिन राज्य सरकार की स्वीकृति का इंतजार है। अदालत ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए यह मंजूरी आवश्यक है। धारा 196 सांप्रदायिक वैमनस्य और घृणा को बढ़ावा देने से संबंधित है।

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