Edited By meena, Updated: 09 Apr, 2026 02:09 PM

इंदौर में ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस की कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान के वंदे मातरम के विरोध के बाद नया विवाद...
इंदौर (सचिन बहरानी) : इंदौर में ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस की कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान के वंदे मातरम के विरोध के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। दोनों पार्षद के खिलाफ एक्शन की तैयारी शुरु हो चुकी है।
अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करके और पार्टी को भाड़ में जाए कहने वाली पार्षद रूबीना इकबाल खान के खिलाफ इंदौर के शहर अध्यक्ष ने निष्कासन का प्रस्ताव भेजा है। जल्द ही पार्टी उनके खिलाफ कड़ा एक्शन ले सकती है। वहीं वंदे मातरम गाने से मना करने वाली पार्षद फौजिया शेख अलीम के खिलाफ भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा कार्यकर्ता थाने पहुंचकर उनके खिलाफ एफआईआर करवाने की तैयारी कर रहे हैं।
किसी के बाप की नहीं सुनते- फोजिया शेख अलीम
कांग्रेस पार्षद फोजिया शेख अलीम ने वंदे मातरम गाने से साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा है कि इस्लाम में वंदे मातरम गाने की इजाजत नहीं है, तो उनकी बात का समर्थन करते हुए दूसरी पार्षद रूबीना खान ने सदन के अंदर भाजपा पार्षदों को चुनौती देते हुए कहा कि एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ।
भाड़ में जाए कांग्रेस- पार्षद रूबीन इकबाल खान
मामला यही खत्म नहीं हुआ इसके बाद भी मीडिया से बात करते हुए रुबीना इकबाल खान ने कहा कि वे जन गण मन सहित अन्य देशभक्ति गीत गाती हैं, लेकिन ‘वंदे मातरम’ के एक शब्द को बोलने से परहेज करती हैं। उनके मुताबिक, “वंदे” का अर्थ इबादत होता है और इस्लाम में सिर्फ अल्लाह की इबादत की जाती है, इसलिए वे इसे नहीं कहतीं। उन्होंने आजादी के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाने वाले लोग शायद धार्मिक पहलुओं को नहीं समझते थे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस देश की मिट्टी पर उनका और उनके समुदाय का उतना ही नहीं, बल्कि अधिक हक है, क्योंकि उन्हें इसी मिट्टी में दफनाया जाता है। खोदोंगे तो हमारे अवशेष यही मिलेंगे लेकिन हिंदुओं के तो गंगा नदी में बहा दिए जाते हैं जो सीधे जाकर अरब सागर में मिलते हैं।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी उनका साथ नहीं देती। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे निर्दलीय चुनाव जीतती हैं और कांग्रेस से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। भाड़ में जाए कांग्रेस।
इस बयान के सामने आने के बाद इंदौर में सियासी माहौल गरमा गया है। अलग-अलग राजनीतिक दल और सामाजिक संगठनों की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, और आने वाले समय में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।