Edited By meena, Updated: 21 Mar, 2026 01:02 PM

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में छिंदवाड़ा कलेक्टर पर 50,000 का जुर्माना लगाया है और उनका आदेश रद्द कर दिया। यह फैसला प्रशासनिक लापरवाही और बिना जांच...
जबलपुर: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में छिंदवाड़ा कलेक्टर पर 50,000 का जुर्माना लगाया है और उनका आदेश रद्द कर दिया। यह फैसला प्रशासनिक लापरवाही और बिना जांच के निर्णय लेने पर सख्त टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
क्या थी कोर्ट की आपत्ति?
कोर्ट ने पाया कि कलेक्टर ने माइनिंग अधिकारी की रिपोर्ट को ठीक से जांचे बिना ही उसे मंजूरी दे दी। इस तरह का रवैया न्यायिक मानकों और प्रशासनिक जिम्मेदारी के खिलाफ माना गया। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी अधिकारी को बिना तथ्यों की पुष्टि किए निर्णय नहीं लेना चाहिए।
पूरा मामला क्या था?
साल 2025 में परिवहन विभाग ने एक ट्रक को अवैध परिवहन के आरोप में जब्त किया था। लेकिन ट्रक के असली मालिक की पहचान किए बिना ही छिंदवाड़ा निवासी सारंग रघुवंशी को मालिक मान लिया गया। उन्होंने अपनी सफाई भी दी, लेकिन विभाग ने उसे नजरअंदाज कर दिया।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
हाईकोर्ट ने कलेक्टर के इस रवैये पर नाराजगी जताई और कहा कि यह लापरवाही नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने न केवल आदेश रद्द किया बल्कि कलेक्टर पर 50,000 का जुर्माना भी लगाया।
याचिकाकर्ता को राहत
कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह जुर्माने की राशि सीधे याचिकाकर्ता सारंग रघुवंशी को दी जाए। यह फैसला उन लोगों के लिए राहत का संकेत है, जिन्हें बिना पर्याप्त जांच के प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।