Edited By Himansh sharma, Updated: 22 Jul, 2026 06:08 PM

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से चोरी हुई सिंधिया रियासत काल की लगभग 400 वर्ष पुरानी तोप की तलाश अब राजस्थान तक पहुंच गई है।
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से चोरी हुई सिंधिया रियासत काल की लगभग 400 वर्ष पुरानी तोप की तलाश अब राजस्थान तक पहुंच गई है। इस सनसनीखेज मामले में मध्य प्रदेश पुलिस को मिले अहम इनपुट के बाद राजस्थान के करौली जिले में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। पुलिस को संदेह है कि करीब 3500 किलोग्राम वजनी इस दुर्लभ तोप को चोरी के बाद हिंडौन क्षेत्र के गांवड़ा मीणा गांव में कहीं छिपाया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश पुलिस की सूचना पर राजस्थान पुलिस ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से गांव में कई स्थानों पर अभियान चलाया। संदिग्ध जगहों पर जेसीबी मशीनों से खुदाई कराई गई और पूरे इलाके की बारीकी से तलाशी ली गई। इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी भी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
इतिहासकारों के अनुसार यह तोप 16वीं शताब्दी की धरोहर मानी जाती है और सिंधिया रियासत के सैन्य इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण विरासत है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय एंटीक बाजार में इसकी कीमत करोड़ों रुपये तक हो सकती है। इसी वजह से जांच एजेंसियां इस चोरी के पीछे संगठित एंटीक तस्करों के नेटवर्क की भी जांच कर रही हैं।
जांच में सामने आया है कि बदमाशों ने वारदात को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया। भारी-भरकम तोप को पहले सुरक्षित तरीके से कपड़ों और गद्दों में लपेटा गया, फिर विशेष ट्रॉली की सहायता से किले से नीचे उतारकर लोडिंग वाहन में रखा गया। घटनास्थल से मिले निशान बताते हैं कि पूरी वारदात पहले से बनाई गई योजना के तहत की गई थी।
मामले की जांच के दौरान किले की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि घटना वाली रात सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं थी। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति और पर्याप्त संसाधनों की कमी का फायदा उठाकर चोर वारदात को अंजाम देने में सफल रहे। पुलिस ने सुरक्षा कर्मियों से पूछताछ की है और उनके बयानों की भी जांच की जा रही है।
घटनास्थल से मिले लोहे के पाइप, गद्दे, घसीटने के निशान और भारी वाहन के टायरों के चिन्ह जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सुराग बने हुए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस चोरी में शामिल लोगों और इस्तेमाल किए गए वाहनों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
उधर, राजस्थान के हिंडौन क्षेत्र में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान भरतपुर से विशेषज्ञों की मेटल डिटेक्टर टीम भी बुलाई गई। कई घंटों तक चली खोजबीन और खुदाई के बावजूद फिलहाल तोप का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच लगातार जारी है और मिले इनपुट के आधार पर आगे भी अभियान चलाया जाएगा।
राज्य पुरातत्व विभाग ने इस घटना को प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर पर गंभीर हमला बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के संकेत दिए हैं। वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस संयुक्त रूप से इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। अधिकारियों का मानना है कि जल्द ही इस बहुचर्चित चोरी का खुलासा किया जा सकता है।