Edited By meena, Updated: 22 Jul, 2026 07:48 PM

मध्य प्रदेश विधानसभा में एक बेहद संवेदनशील और डरावनी रिपोर्ट सामने आई है। जिसके मुताबिक, राज्य में 2021 से 2025 के बीच 61,112 लड़कियां लापता हुईं है...
भोपाल : मध्य प्रदेश विधानसभा में एक बेहद संवेदनशील और डरावनी रिपोर्ट सामने आई है। जिसके मुताबिक, राज्य में 2021 से 2025 के बीच 61,112 लड़कियां लापता हुईं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 3,241 लड़कियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। यह जानकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा में लिखित रूप में दी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद, नाबालिग लड़कियों के लापता होने के सभी मामलों को "अपहरण" के तौर पर दर्ज किया जाता है, ताकि बिना किसी ढिलाई के पुलिस तुरंत और पूरी तरह से जांच कर सके। सदन में पेश किए गए साल-दर-साल के आंकड़ों में बढ़ोतरी का रुझान दिखा: 2021 में 9,407 मामले; 2022 में 9,093; 2023 में 11,250; 2024 में 11,907 और 2025 में सबसे ज़्यादा 13,146 मामले सामने आए। यह पांच वर्षों में दर्ज घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में विधानसभा को बताया कि इसी अवधि के दौरान 61,498 लड़कियों का सफलतापूर्वक पता लगाया गया और उन्हें सुरक्षित वापस लाया गया। इस रिकवरी के आंकड़े में 2021 से पहले के कई लंबित मामले भी शामिल हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि 2021 की शुरुआत में 3,627 मामले लंबित थे, जो उस बैकलॉग को दर्शाता है जिसे अधिकारियों को नई रिपोर्टों के साथ-साथ निपटाना था। जवाब में दी गई जानकारी से मौजूदा चुनौतियों का भी पता चलता है; अकेले 2026 के पहले पांच महीनों में ही लड़कियों के लापता होने के 6,309 नए मामले दर्ज किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में कहा कि इन नई घटनाओं की जांच और खोज अभियान सक्रिय रूप से चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में यह भी बताया कि मध्य प्रदेश सरकार राज्य भर में लड़कियों के अपहरण और तस्करी को रोकने के लिए 'ऑपरेशन मुस्कान' लागू कर रही है। इस व्यापक अभियान के तहत, 'ऑपरेशन सृजन' विशेष रूप से लड़कियों पर केंद्रित है, जबकि 'ऑपरेशन अभिमन्यु' लड़कों से जुड़े मामलों को देखता है।
प्रगति की निगरानी करने और लापता बच्चों की जल्द बरामदगी सुनिश्चित करने के लिए मासिक समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। इसके अलावा, राज्य ने राज्य स्तर पर एक 'एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्यूरो' स्थापित किया है और मध्य प्रदेश में चल रहे सभी 52 महिला पुलिस स्टेशनों में खास 'एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स' बनाई हैं।