तो इसलिए लक्ष्मी वर्मा को BJP ने दिया राज्यसभा टिकट, पार्षद से सासंद तक की कहानी है रोचक, इस वजह से पीछे छूटे दिग्गज

Edited By Desh Raj, Updated: 04 Mar, 2026 02:37 PM

lakshmi verma gets rajya sabha ticket story from councilor to mp

छतीसगढ़ की 2 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। Rajya Sabha Elections: जहां बीजेपी ने अपने प्रत्याशी तय कर दिए हैं वहीं कांग्रेस अभी तक उम्मीदवार तय नहीं कर पाई है। कल बीजेपी ने लक्ष्मी वर्मा को टिकट देकर उन पर भरोसा जताया है। लेकिन ...

(रायपुर): छतीसगढ़ की 2 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। Rajya Sabha Elections: जहां बीजेपी ने अपने प्रत्याशी तय कर दिए हैं वहीं कांग्रेस अभी तक उम्मीदवार तय नहीं कर पाई है। कल बीजेपी ने लक्ष्मी वर्मा को टिकट देकर उन पर भरोसा जताया है। लेकिन  क्या आप जानते हैं कि जिस लक्ष्मी वर्मा को बीजेपी ने अपना राज्यसभा प्रत्याशी बनाया है उनका राजनीतिक करियर कब और कहां से शुरु हुआ था।

लक्ष्मी वर्मा की पार्षद से हुई थी राजनीतिक करियर की शुरुआत

बीजेपी का टिकट पाने वाली लक्ष्मी वर्मा के राजनीतिक सफर की शुरुआत पार्षद से हुई थी। साल 1994 में उन्होंने रायपुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 7 से पार्षद के तौर पर इस सफर पर कदम रखा था। लक्ष्मी वर्मा का राजनीतिक जीवन धरातल की राजनीति और  सामाजिक सरोकार के साथ ही महिला उत्थान की  दिशा में अहम रहा है।

संगठन और समाज में कई जिम्मेवारियों का किया सफल निर्वहन

पार्षद के तौर पर काम करते हुए लक्ष्मी वर्मा ने नगर की बुनियादी सुविधाओं के साथ ही लोगों की दूसरी समस्याओं को सही तरीक से प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद वो जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष  भी रहीं।

इसके साथ ही लक्ष्मी वर्मा कुर्मी समाज और विभिन्न महिला संगठनों से जुड़कर समाज में अपने कर्तव्य का अलग ही निर्वहन करती रहीं। इसके साथ ही पार्टी में उन्होंने संगठनात्मक स्तर पर कई जिम्मेदारियां निभाईं। भाजपा को मजबूत करने की दिशा में उन्होंने  महिला मोर्चा, जिला संगठन से लेकर प्रदेश स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई। उनकी यही खूबियां और सकारात्मक माहौल पार्टी को अच्छा लगा और उन्हें राज्यसभा का टिकट दिया।

लक्ष्मी के साथ राज्यसभा उम्मीदवार के लिए चल रहे थे कई नाम

जानकारी के मुताबिक राज्यसभा के  दावेदारों के शुरुआती पैनल में लक्ष्मी वर्मा के साथ नारायण चंदेल, सरोज पांडेय, किरण बघेल  जैसे नाम थे। इन नामों में भी काफी मंथन के बाद 3 नाम शॉर्टलिस्ट किए गए । लेकिन विचार किया गया कि  संगठन और सामाजिक समीकरण के साथ ही महिला को मौका दिया जाए। पार्टी नेतृत्व ने लक्ष्मी वर्मा के संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के सारे पहलुओं पर गौर करते हुए राज्यसभ का टिकट देने का फैसला लिया। इसके साथ ही लक्ष्मी वर्मा के नाम को सीएम विष्णुदेव साय का भी समर्थन मिला।

लिहाजा अब लक्ष्मी वर्मा 5 मार्च को अपना नामांकन दाखिल करेंगी। तो देखा जा सकता है  कि  स्थानीय राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाली लक्ष्मी वर्मा ने पार्षद से लेकर राज्यसभा तक के टिकट के लिए किस तरह से सफर तय किया है।

 

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