Edited By meena, Updated: 26 Jan, 2026 08:26 PM

नई दिल्ली गणतंत्र दिवस परेड 2026 में मध्यप्रदेश की झांकी ‘पुण्यश्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर’ ने कर्तव्य पथ पर अपनी भव्य और भावपूर्ण प्रस्तुति से देशवासियों का ध्यान आकर्षित किया...
नई दिल्ली/भोपाल : नई दिल्ली गणतंत्र दिवस परेड 2026 में मध्यप्रदेश की झांकी ‘पुण्यश्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर’ ने कर्तव्य पथ पर अपनी भव्य और भावपूर्ण प्रस्तुति से देशवासियों का ध्यान आकर्षित किया। यह झांकी लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती को समर्पित रही, जिसमें उनके गौरवशाली व्यक्तित्व, सुशासन, आत्मनिर्भरता, नारी सशक्तीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण की विरासत को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया गया।
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परेड की सलामी ली। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्रीमंडल के सदस्य और अन्य विशिष्ट अतिथि परेड के साक्षी बने। झांकी के अग्र भाग में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की चिर-परिचित प्रतिमा को दर्शाया गया, जिसमें वे हाथ में शिवलिंग धारण किए पद्मासन में विराजमान हैं। यह दृश्य भारतीय मातृशक्ति की सौम्यता, गरिमा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।
मध्य भाग में लोकमाता अहिल्याबाई अपने मंत्री-गण एवं सैनिकों के साथ प्रदर्शित हैं, जो उनके सुदृढ़ प्रशासन, न्यायप्रिय शासन व्यवस्था और लोककल्याणकारी दृष्टि को दर्शाता है। इसके निचले हिस्से में उनके शासनकाल में होलकर साम्राज्य द्वारा कराए गए मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्यों का प्रभावशाली चित्रण किया गया, जहाँ एक सैनिक द्वारा पहरा देना सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का संदेश देता है।
झांकी के पश्च भाग में लोकमाता अहिल्याबाई की राजधानी महेश्वर के प्रसिद्ध घाट, मंदिर और किले का भव्य दृश्य प्रस्तुत किया गया। पवित्र नर्मदा नदी, घाटों और नौकाओं का मनोहारी अंकन झाँकी को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान करता है। महेश्वर घाट स्थित मंदिरों के शिखर पृष्ठभूमि में दिखाई देते हैं। साथ ही भित्तिचित्रों में लोकमाता अहिल्याबाई के मार्गदर्शन में महिलाएँ महेश्वरी साड़ी की बुनाई करती हुई नजर आती हैं, जो उनके शासनकाल में नारी सशक्तीकरण, स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा का सशक्त प्रमाण है।