रामायण को राष्ट्रग्रंथ घोषित किया जाए-स्वामी रामभद्राचार्य, बड़ा दावा किया-पहलगाम आतंकी हमले पर PM से कही थी दंड देने की बात

Edited By Desh sharma, Updated: 03 Jan, 2026 02:17 PM

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स्वामी रामभद्राचार्य ने जबलपुर में आयोजित चौथे विश्व रामायण सम्मेलन में एक ऐसी मांग रख दी है जिसके काफी चर्चा हो रही है। ये मांग सुर्खियां बटोर रही है।

(जबलपुर): स्वामी रामभद्राचार्य ने जबलपुर में आयोजित चौथे विश्व रामायण सम्मेलन में एक ऐसी मांग रख दी है जिसके काफी चर्चा हो रही है। ये मांग सुर्खियां बटोर रही है।

चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का जबलपुर में शुभारंभ

दरअसल चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का शुक्रवार को जबलपुर के मानस भवन सभागार में शुभारंभ हुआ है।इस मौके पर चित्रकूट के तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य, सीएम मोहन यादव के  साथ ही केन्द्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत उद्घाटन के मौक पर मौजूद रहे । इसी मौके पर रामभद्राचार्य ने रामायण को राष्ट्रग्रंथ घोषित करने की मांग कर दी। जो अब सुर्खियां बटोर रही है।

रामायण को राष्ट्रग्रंथ घोषित की मांग

सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वामी रामभद्राचार्य ने राम शब्द का अर्थ बताते हुए कहा कि ‘रा’ राष्ट्र का प्रतीक है और ‘म’ मंगल का।  उन्होंने कहा कि विश्व रामायण सम्मेलन तभी सार्थक होगा जब संसद में रामायण को राष्ट्रग्रंथ का दर्जा मिलेगा। स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि राम हैं कौन, क्या योगियों में रमने वाले, सबको रमाने वाले राम हैं ? उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है, रा का अर्थ है राष्ट्र, म का अर्थ है मंगल।

पहलगाम आतंकी हमले का किया जिक्र

इस दौरान रामभद्राचार्य ने पहलगाम आतंकी हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा ति उस समय देश आक्रोशित था, देशवासी गुस्से में थे । रामभद्राचार्य ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्होंने कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर चर्चा की थी और धर्मग्रंथों से प्रेरित न्याय के सिद्धांत की बात कही थी। आतंकवाद के खिलाफ कड़े रुख की वकालत करते हुए राष्ट्रहित में निर्णायक कदम उठाने की बात कही थी।

स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले को लेकर मैने पीएम नरेंद्र मोदी  से कहा कि इसका दंड दिया जाना चाहिए। मैने सुंदरकांड की पंक्ति “जिन मोहि मारा तिन्ह मैं मारे” का उल्लेख करते हुए आधार बनाकर दंड देने की बात कही  थी। इसके बाद ही ऑपरेशन सिंदूर चलाकर सबक सिखाया गया था।  उन्होंने कहा कि “ऊं शांति” बुढ्ढों का नारा है, अब तो “ऊं क्रांति का नारा होना चाहिए।

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