Edited By meena, Updated: 26 Apr, 2026 04:43 PM

मध्य प्रदेश में जल्द होने जा रही भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। यह बैठक संगठनात्मक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम...
एमपी डेस्क : मध्य प्रदेश में जल्द होने जा रही भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। यह बैठक संगठनात्मक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम को अंतिम रूप दिया जा सकता है। खास बात यह है कि इस बार मध्यप्रदेश की भूमिका पहले से ज्यादा मजबूत नजर आ रही है और कई बड़े नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
सबसे ज्यादा चर्चा संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति को लेकर है। इन दोनों शीर्ष इकाइयों में जगह मिलना किसी भी नेता के लिए बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक कैलाश विजयवर्गीय और एक अन्य नेता का नाम प्रमुखता से सामने आए हैं। अगर इनमें से किसी को इन समितियों में शामिल किया जाता है, तो यह मध्यप्रदेश के राजनीतिक प्रभाव को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करेगा।
वहीं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद के लिए नरोत्तम मिश्रा और राकेश सिंह को संभावित दावेदार माना जा रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय महासचिव पद पर विष्णुदत्त शर्मा और कविता पाटीदार के नामों पर गंभीरता से विचार चल रहा है। इस बार पार्टी महिला नेतृत्व को भी बढ़ावा देने के मूड में दिख रही है, ऐसे में मध्यप्रदेश से किसी महिला नेता को महासचिव बनाए जाने की संभावना भी मजबूत मानी जा रही है।
राष्ट्रीय मंत्री पद के लिए अरविंद भदौरिया और गौरव तिवारी के नाम चर्चा में हैं, जबकि राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर आशीष अग्रवाल और जीतू जिराती को लेकर अटकलें तेज हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के रूप में रामेश्वर शर्मा और भक्ति शर्मा के नामों पर भी विचार किया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि इस बार संगठन में बड़े स्तर पर संतुलन साधने की कोशिश हो रही है, जिसमें क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को खास महत्व दिया जाएगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश भाजपा को नया प्रभारी और सह-प्रभारी मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। चर्चा है कि गुजरात से किसी वरिष्ठ नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
कुल मिलाकर, भाजपा की इस अहम बैठक से संगठन में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। अगर मध्यप्रदेश को अपेक्षित प्रतिनिधित्व मिलता है, तो इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर साफ तौर पर दिखाई दे सकता है।