UGC के नए नियमों का MP में विरोध, सवर्ण समाज ने भाजपा को वोट न देने की खाई कसम, जानें क्या हुआ बदलाव

Edited By meena, Updated: 27 Jan, 2026 01:26 PM

ugc s new rules face opposition in madhya pradesh

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से जारी नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध जारी है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में भी सवर्ण समाज ने भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है...

भोपाल : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से जारी नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध जारी है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में भी सवर्ण समाज ने भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। अशोकनगर जिले में सवर्ण संगठनों विरोध शुरू करते हुए अपने बच्चों को साक्षी मानकर भाजपा को कभी वोट न देने की कमस खाई है और आंदोलन की चेतावनी दी है। इसके बाद सियासी पारा चढ़ गया है।

सवर्ण समाज ने बताया काला कानून

अशोकनगर जिले में करणी सेना, सवर्ण आर्मी, अग्रवाल समाज, ब्राह्मण समाज, रघुवंशी समाज सहित जैन समाज ने एक बैठक का आयोजन किया जिसमें कई प्रतिनिधि शामिल हुए। सबने एक सुर में इस कानून को सवर्ण समाज के बच्चों के लिए काला कानून बताया। इस काले कानून के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई और 30 जनवरी को सामूहिक विज्ञापन देने पर सहमति बनाई। इस दौरान बैठक सवर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा ने केंद्र सरकार को काला कानून वापस लेने की बात कही नहीं तो 30 जनवरी को इस कानून के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र से लेकर राज्य में BJP की सरकार है। इस काले कानून पर सहमति देना सवर्ण समाज पर अत्याचार है। इस दौरान बैठक में उपस्थित लोगों ने अपने बच्चों को साक्षी मानकर हाथ उठाकर यूजीसी कानून के विरोध में भाजपा को वोट नहीं देने की कसम खाई।

UGC क्या है और उसका नया रेगुलेशन क्या है?

UGC (University Grants Commission) देश में उच्च शिक्षा से जुड़ी सबसे अहम संस्था है। इसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की गुणवत्ता तय करना, उन्हें मान्यता और फंडिंग देना और छात्रों और शिक्षकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है। इसी UGC ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिए हैं। उनके मुताबिक, इस नियम का उद्देश्य- कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकना, सभी वर्गों के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को सुरक्षित, समान और सम्मानजनक माहौल देना है।

नए कानून में क्या बड़ा बदलाव किया गया है?

अब तक उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें, मुख्य रूप से SC (अनुसूचित जाति) और ST (अनुसूचित जनजाति) तक सीमित मानी जाती थीं। नए नियम में OBC अन्य पिछड़ा वर्ग को भी साफ तौर पर इस दायरे में शामिल कर लिया गया है। इसका मतलब अब OBC छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी अपने साथ हुए किसी भी तरह के भेदभाव, उत्पीड़न या अपमान की आधिकारिक शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में क्या करना होगा अनिवार्य?

नए नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में SC, ST और OBC के लिए ‘समान अवसर प्रकोष्ठ’ बनाना जरूरी होगा। यूनिवर्सिटी स्तर पर एक समानता समिति) बनाई जाएगी।

इस समिति में अनिवार्य रूप से शामिल होंगे:

  • OBC प्रतिनिधि
  • महिला प्रतिनिधि
  • SC और ST प्रतिनिधि
  • दिव्यांग वर्ग का प्रतिनिधि

यह समिति हर 6 महीने में रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट UGC को भेजी जाएगी। UGC का दावा है कि इससे शिकायतों की निगरानी बेहतर होगी,संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

सवर्ण समाज कर रहा विरोध

नियम लागू होते ही देश के कई हिस्सों में अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों में असंतोष देखने को मिला। विरोध करने वालों का आरोप है कि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है। झूठी शिकायतों के जरिए अगड़ी जातियों के छात्र और शिक्षक फंसाए जा सकते हैं। जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा, वैश्य संगठन ने मिलकर ‘सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4)’ बनाई है, ताकि इस नियम के खिलाफ संगठित आंदोलन किया जा सके।

सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग

इस नियम को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो, पोस्ट और लाइव बहसों की बाढ़ आ गई है। अगड़ी जातियों से जुड़े कई यूट्यूबर, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और एक्टिविस्ट इसे “सवर्ण विरोधी कानून” बता रहे हैं। स्वामी आनंद स्वरूप के एक वीडियो में सवर्ण समाज से एकजुट होने की अपील के बाद बहस और तेज हो गई। वहीं दूसरी ओर सामाजिक न्याय समर्थक, छात्र संगठन और एक्टिविस्ट इसे बराबरी, सम्मान और भेदभाव खत्म करने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं।

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