कागजों में बंट गया तीन महीने का राशन, गोदाम में अनाज गायब; MP के इस जिले में ₹1.04 करोड़ का घोटाला

Edited By Himansh sharma, Updated: 01 Oct, 2026 01:00 PM

1 04 cr ration scam exposed in narmadapuram

जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचने वाले राशन में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई है।

नर्मदापुरम। जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचने वाले राशन में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई है। दो शासकीय उचित मूल्य दुकानों की जांच में करीब 1.04 करोड़ रुपए के खाद्यान्न के हिसाब में भारी अंतर मिला है। ई-पॉस मशीन के रिकॉर्ड में हजारों किलो गेहूं और चावल का स्टॉक दर्ज था, लेकिन जब मौके पर भौतिक सत्यापन किया गया तो निर्धारित मात्रा की तुलना में बेहद कम अनाज मिला।

जांच में सामने आया कि एक दुकान के रिकॉर्ड में जितना राशन उपलब्ध होना बताया गया था, उसका लगभग पूरा हिस्सा मौके से गायब था। इसी तरह दूसरी दुकान में भी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच बड़ा अंतर पाया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए अब संबंधित दुकान संचालकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।

पहली दुकान में 17 हजार किलो से ज्यादा अनाज का अंतर

दुकान क्रमांक 2601055 के ई-पॉस रिकॉर्ड के अनुसार वहां 14,070 किलो गेहूं और 3,406 किलो चावल उपलब्ध होना चाहिए था। लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान मौके पर केवल 300 किलो गेहूं और 100 किलो चावल मिला। इस दुकान में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच करीब 33.17 लाख रुपए की गड़बड़ी सामने आई। यानी दस्तावेजों में जिस मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध बताया जा रहा था, वास्तविकता में उसका बेहद छोटा हिस्सा ही दुकान पर मौजूद मिला।

दूसरी दुकान में भी लाखों के राशन का हिसाब गायब

दूसरी दुकान क्रमांक 2601065 की जांच में स्थिति और भी गंभीर मिली। रिकॉर्ड में 20,757 किलो गेहूं और 4,919 किलो चावल दर्ज था, लेकिन मौके पर सिर्फ 400 किलो गेहूं और 200 किलो चावल मिला। जांच के मुताबिक इस दुकान में करीब 70.82 लाख रुपए के खाद्यान्न का अंतर पाया गया। दोनों दुकानों को मिलाकर खाद्यान्न की कुल अनियमितता की राशि 1,03,99,851 रुपए आंकी गई है।

कागजों में पहले ही बांट दिया राशन, परिवारों को नहीं मिला अनाज

जांच के दौरान राशन वितरण के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल खड़े हुए। दस्तावेजों में मई 2025 के दौरान जून से अगस्त तक का राशन वितरित किया जाना दर्शाया गया था। दूसरी ओर, शिकायत और जांच में यह बात सामने आई कि करीब 250 से 300 परिवारों को लगातार तीन महीने तक राशन नहीं मिलने की स्थिति बनी रही। इससे राशन वितरण के रिकॉर्ड और वास्तविक लाभार्थियों तक खाद्यान्न पहुंचने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं।

एक साल बाद FIR के निर्देश, पिता-पुत्र पर कार्रवाई

मामले में जांच के करीब एक साल बाद अब कार्रवाई आगे बढ़ी है। प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी सरोज सिंह परिहार ने 28 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर संबंधित दुकान के प्रबंधक प्रकाश तिवारी और विक्रेता हर्ष तिवारी के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। दोनों पिता-पुत्र बताए गए हैं।

इसके बाद कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी अमित साहू ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। विभाग की ओर से दोनों से 1,03,99,851 रुपए की राशि की वसूली भू-राजस्व की तरह किए जाने की प्रक्रिया भी बताई गई है।

दोनों दुकानें निलंबित, दूसरे केंद्रों से मिलेगा राशन

गड़बड़ी सामने आने के बाद विभाग ने दोनों उचित मूल्य दुकानों को निलंबित कर दिया है। इन दुकानों से जुड़े हितग्राहियों को राशन उपलब्ध कराने के लिए उन्हें नजदीकी जय भोले और बालागंज उपभोक्ता भंडार से अटैच किया गया है। इससे प्रभावित परिवारों को आगे राशन लेने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।

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