Edited By Himansh sharma, Updated: 16 Sep, 2026 05:28 PM
मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय करीब आने के साथ मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय करीब आने के साथ मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। प्रदेश में 19 सितंबर के बाद एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है। यदि सिस्टम ने मजबूती पकड़ी, तो सितंबर के बचे दिनों में अच्छी बारिश होने के साथ प्रदेश मानसून के औसत वर्षा आंकड़े को भी पूरा कर सकता है। मौसम के मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में अब तक करीब 33 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। प्रदेश की सामान्य मानसूनी बारिश का औसत लगभग 37.3 इंच है। इस हिसाब से सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी करीब 4.3 इंच बारिश और जरूरी है।
17 सितंबर से बढ़ सकती है बारिश की गतिविधि
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश का दायरा धीरे-धीरे बढ़ सकता है। 17 से 19 सितंबर के बीच पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा की गतिविधियां अधिक व्यापक रहने की संभावना है। वहीं 18 से 21 सितंबर के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश देखने को मिल सकती है। कुछ स्थानों पर तेज बारिश भी हो सकती है, जबकि अन्य इलाकों में हल्की से मध्यम वर्षा का दौर जारी रह सकता है। इस बीच 19 सितंबर के बाद बनने वाला संभावित सिस्टम प्रदेश के मौसम के लिए अहम माना जा रहा है। इसकी ताकत और दिशा के आधार पर बारिश की तीव्रता में बदलाव देखने को मिल सकता है।
मानसून की विदाई से पहले बारिश का आखिरी बड़ा दौर?
मध्य प्रदेश में आधिकारिक मानसून अवधि सामान्य तौर पर 1 जून से 30 सितंबर तक मानी जाती है। हालांकि कई वर्षों में मानसून की वापसी सितंबर के बाद अक्टूबर के शुरुआती दिनों तक भी खिंचती रही है। इस बार सितंबर के अंतिम हिस्से में विदाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। ऐसे में मानसून के पूरी तरह विदा होने से पहले प्रदेश में बारिश का एक और महत्वपूर्ण दौर देखने को मिल सकता है। अगर आगामी सिस्टम प्रभावी रहा, तो जिन जिलों में अभी बारिश की कमी है, वहां भी आंकड़ों में सुधार हो सकता है।
88 फीसदी से ज्यादा बारिश, कई जिले सामान्य से आगे
मंगलवार तक प्रदेश में सामान्य बारिश की तुलना में करीब 88.5 प्रतिशत वर्षा हो चुकी थी। भोपाल और ग्वालियर समेत 18 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में अब होने वाली अतिरिक्त बारिश सामान्य औसत से ऊपर जाएगी। अधिक बारिश वाले जिलों में भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं।
दूसरी ओर प्रदेश के 37 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। इनमें इंदौर, उज्जैन और जबलपुर जैसे प्रमुख जिले भी शामिल हैं। अलीराजपुर में बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर के मुकाबले काफी नीचे है, जबकि निवाड़ी में सामान्य से लगभग 49 प्रतिशत अधिक पानी दर्ज किया जा चुका है।
फिलहाल कई शहरों में मौसम शांत
मंगलवार को पश्चिमी मध्य प्रदेश में सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और मानसून ट्रफ की गतिविधि के बावजूद प्रदेश में कहीं भी बहुत तेज बारिश दर्ज नहीं हुई। राजधानी भोपाल में दिन के समय धूप रही। इंदौर और उज्जैन में भी मौसम अपेक्षाकृत सामान्य बना रहा। अब निगाहें 17 सितंबर से शुरू होने वाली बारिश की गतिविधियों और खासतौर पर 19 सितंबर के बाद सक्रिय होने वाले संभावित सिस्टम पर हैं। यही सिस्टम तय कर सकता है कि मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंचता है या नहीं।