बरगी बांध हादसा: क्रूज डूबते ही 35 मजदूरों ने लगाई छलांग, बिना ट्रेनिंग 12 लोगों को बचाकर बने असली हीरो

Edited By Himansh sharma, Updated: 02 May, 2026 07:38 PM

35 workers turn heroes save 12 lives in jabalpur cruise tragedy

बरगी बांध में हुआ क्रूज हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि इंसानियत की मिसाल बन गया।

जबलपुर। बरगी बांध में हुआ क्रूज हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि इंसानियत की मिसाल बन गया। जिस वक्त लहरों के बीच क्रूज डगमगाकर डूबने लगा और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई, उसी वक्त पास ही ‘जल जीवन मिशन’ के तहत काम कर रहे करीब 35 मजदूर देवदूत बनकर सामने आ गए। बिना किसी लाइफ जैकेट, बिना किसी ट्रेनिंग और बिना पल गंवाए इन मजदूरों ने अपने औजार फेंके और जान की परवाह किए बिना उफनते पानी में छलांग लगा दी।

बंगाल के रमजान बने साहस की मिसाल

इस पूरी घटना में पश्चिम बंगाल के 22 वर्षीय रमजान की बहादुरी सबसे ज्यादा चर्चा में है। रमजान बताते हैं - मैंने क्रूज को डूबते देखा तो एक पल भी नहीं सोचा। उन्होंने अपने शरीर पर रस्सी बांधी और करीब 25 फीट ऊंची चट्टान से सीधे पानी में छलांग लगा दी। तेज बहाव के बीच उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर 6 लोगों को पानी से बाहर निकाला, जिनमें से 4 की जान बचाई जा सकी।

बिहार और यूपी के मजदूरों का सामूहिक साहस

बिहार के पश्चिम चंपारण निवासी 28 वर्षीय बिंद्रा कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने पायलट को रुकने के लिए आवाज भी लगाई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इसके बाद मजदूरों ने मिलकर एक-दूसरे का हाथ पकड़कर “ह्यूमन चेन बनाई और डूबते लोगों को किनारे तक खींचने का प्रयास शुरू कर दिया। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी 18 वर्षीय राज कुमार और शिवनाथ ने भी रस्सियों की मदद से कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। सबसे खास बात यह रही कि इन सभी के पास न तो कोई रेस्क्यू ट्रेनिंग थी और न ही सुरक्षा उपकरण फिर भी उनका हौसला अडिग था।

सरकार की सराहना और सम्मान की घोषणा

इस साहसिक बचाव अभियान के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने भी इन मजदूरों के जज्बे को सलाम किया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि जान की बाजी लगाकर लोगों की जान बचाने वाले इन 35 मजदूरों को 51-51 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि यह भी साबित करती है कि संकट की घड़ी में साधारण मजदूर भी असाधारण नायक बन सकते हैं। तकनीक और संसाधनों की कमी के बावजूद, इन लोगों ने जो किया वह इंसानियत की सबसे बड़ी परिभाषा है।

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