Edited By Himansh sharma, Updated: 19 Apr, 2026 01:14 PM

मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर संगठनात्मक फेरबदल की आहट तेज हो गई है।
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर संगठनात्मक फेरबदल की आहट तेज हो गई है। पार्टी के कई जिलाध्यक्षों की कार्यशैली और संगठनात्मक प्रदर्शन पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) को जल्द ही जिलाध्यक्षों की समीक्षा रिपोर्ट भेजी जाएगी, जिसके आधार पर कई नेताओं की जिम्मेदारी बदली जा सकती है।
बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के संगठन सृजन अभियान के तहत जिन जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी, उनमें से करीब 12 जिलाध्यक्ष अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए। एआईसीसी की ओर से मध्यप्रदेश भेजे गए वामसी रेड्डी की समीक्षा में कई जिलों की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई है। अब दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद कमजोर प्रदर्शन वाले जिलाध्यक्षों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
सूत्रों की मानें तो पूर्व मंत्री और कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (CEC) के सदस्य ओमकार सिंह मरकाम, जो डिंडोरी के जिलाध्यक्ष हैं, सतना विधायक और ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह, जो सतना जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, और मंडला के पूर्व विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले जैसे बड़े नेताओं का प्रदर्शन भी संगठन की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है।
इधर इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे को लेकर भी पार्टी के भीतर नाराजगी बताई जा रही है। उनके कुछ फैसलों और बयानों को लेकर संगठन असहज नजर आया। खासतौर पर दिग्विजय सिंह के इंदौर प्रदर्शन और वंदे मातरम विवाद पर बिना शीर्ष नेतृत्व से चर्चा किए दिए गए बयानों के बाद उनकी भूमिका पर सवाल उठे हैं। ऐसे में इंदौर शहर अध्यक्ष पद पर भी बदलाव की संभावना बढ़ गई है।
गौरतलब है कि पिछले साल जून 2025 में भोपाल से राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान की शुरुआत की थी। लगभग दो महीने तक चली बैठकों और मंथन के बाद जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन अब महज आठ महीने बाद ही कई पदों पर बदलाव की तैयारी कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों को नई दिशा दे सकती है।