Edited By Himansh sharma, Updated: 31 May, 2026 08:36 PM

मध्यप्रदेश में बेतहाशा बिजली कटौती को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य अब पार्टी संगठन के निशाने पर आ गए हैं।
गुना। मध्यप्रदेश में बेतहाशा बिजली कटौती को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य अब पार्टी संगठन के निशाने पर आ गए हैं। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को सार्वजनिक मंच से "नाकारा" और "दिखावटी" बताने वाले विधायक के खिलाफ भाजपा संगठन ने कड़ा रुख अपना लिया है। मामले की रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भेज दी गई है और जल्द ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
रविवार को भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सिकरवार ने साफ संकेत दिए कि पार्टी अनुशासन से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने विधायक के बयान को निंदनीय बताते हुए कहा कि भाजपा में किसी भी नेता को सार्वजनिक रूप से अपने ही सहयोगियों के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी करने की छूट नहीं है। संगठन को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दे दी गई है और आगे का निर्णय प्रदेश नेतृत्व करेगा।
दरअसल विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब विधायक पन्नालाल शाक्य बिजली कटौती से परेशान नागरिकों के साथ बिजली कंपनी के कार्यालय पहुंचे। अधिकारियों को फटकार लगाने के दौरान उनका गुस्सा अपनी ही सरकार के मंत्रियों पर फूट पड़ा। शाक्य ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पर तंज कसते हुए कहा कि जनता को दिखावा नहीं, बल्कि परिणाम चाहिए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि मुख्यमंत्री से ऐसे "नाकारा मंत्रियों" को हटाने की मांग करेंगे।
विधायक के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। खास बात यह है कि जिन दो मंत्रियों पर शाक्य ने हमला बोला, वे दोनों केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेहद करीबी माने जाते हैं। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम को केवल बिजली संकट का मुद्दा नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर चल रही गुटबाजी और शक्ति संतुलन की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को सरकार या प्रशासन के कामकाज को लेकर शिकायत है तो पार्टी के भीतर अपनी बात रखने के पर्याप्त मंच मौजूद हैं। सार्वजनिक बयानबाजी से संगठन की छवि प्रभावित होती है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अब निगाहें प्रदेश भाजपा नेतृत्व पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि विधायक पन्नालाल शाक्य को भोपाल तलब किया जा सकता है या फिर कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा सकता है। ऐसे में बिजली संकट पर उठी आवाज अब भाजपा के भीतर अनुशासन और सियासी खींचतान के बड़े विवाद में बदलती नजर आ रही है।