दूर गांव से आया परिवार 3 दिन तक कलेक्टर से मिलने के लिए तरसा, बस स्टैंड में गुजारी रातें, कलेक्टर को पता चला चैंबर छोड़ सीधे मिलने पहुंचे

Edited By Desh Raj, Updated: 19 Apr, 2026 05:28 PM

a family from a distant village waited three days to meet the collector

छतरपुर जिला मुख्यालय में एक बार फिर दूरदराज से आने वाले ग्रामीणों की परेशानी सामने आई है। अधिकारियों तक सीधी पहुंच न होने के कारण लोग दिनों तक भटकते रहते हैं।  ऐसा ही मामला गौरिहार तहसील के ग्राम गौहानी से आए एक पीड़ित परिवार का सामने आया,

छतरपुर( राजेश चौरसिया): छतरपुर जिला मुख्यालय में एक बार फिर दूरदराज से आने वाले ग्रामीणों की परेशानी सामने आई है। अधिकारियों तक सीधी पहुंच न होने के कारण लोग दिनों तक भटकते रहते हैं।  ऐसा ही मामला गौरिहार तहसील के ग्राम गौहानी से आए एक पीड़ित परिवार का सामने आया, जो कलेक्टर से मिलने के लिए तीन दिनों तक कलेक्ट्रेट के चक्कर काटता रहा, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया।

पीड़ित परिवार में महिला गौरी, पप्पू और भगवानदीन अहिरवार सहित सदस्य तीन दिन तक जिला मुख्यालय में ही डटे रहे। इस दौरान उन्होंने पास स्थित दीनदयाल रसोई में खाना खाकर और रात बस स्टैंड के यात्री प्रतीक्षालय में गुजारते हुए किसी तरह समय बिताया। परिवार का कहना था कि वे लगातार कलेक्टर से मिलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन गार्ड और अधीनस्थ कर्मचारी उन्हें अंदर नहीं जाने दे रहे थे।

कलेक्टर खुद मिलने पहुंचे..

मामले की जानकारी जब कलेक्टर तक पहुंची तो उन्होंने शानदार काम किया । जानकारी मिलते ही कलेक्टर तुरंत अपने चैंबर से बाहर आए और खुद पीड़ित परिवार के पास पहुंचकर उनकी समस्या सुनी। उन्होंने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को मामले के निराकरण के निर्देश दिए।

पीड़ित भगवानदीन अहिरवार ने आवेदन में आरोप लगाया है कि हल्का पटवारी संतोष प्रजापति ने गांव के कुछ लोगों से मिलकर उनकी भूमि के नक्शे में फेरबदल कर दिया है। खसरा नंबर 905/2, 905/2/1 और 891/1 की जमीन में गलत तरमीम कर उनकी जमीन को रिकॉर्ड से गायब कर दिया गया है। इससे उनकी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। आवेदन में यह भी आरोप है कि विपक्षी पक्ष द्वारा उन्हें धमकियां दी जा रही हैं और जमीन छीनने की कोशिश की जा रही है। पीड़ित ने पटवारी के खिलाफ कार्रवाई और भूमि रिकॉर्ड में सुधार की मांग की है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में खास बात यह रही कि कलेक्टर से मुलाकात के बाद पीड़ित परिवार के चेहरे पर संतोष नजर आया। उनका कहना था कि “साहब ने हमारी बात सुन ली, अब हमें उम्मीद है कि समस्या का समाधान जरूर होगा।” यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े करता है, लेकिन साथ ही यह भी दिखाता है कि यदि अधिकारी सीधे जनता से जुड़ें तो समस्याओं का समाधान आसान हो सकता है।

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