Edited By Desh Raj, Updated: 10 Sep, 2026 11:01 PM

भोपाल में शिक्षक भर्ती के पद बढ़ाने और दूसरी काउंसलिंग शुरू कराने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। वर्ग-1 में 10 हजार, वर्ग-2 में 10 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है।
(भोपाल): भोपाल में शिक्षक भर्ती के पद बढ़ाने और दूसरी काउंसलिंग शुरू कराने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। वर्ग-1 में 10 हजार, वर्ग-2 में 10 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है। अभ्यर्थी अपने तर्क दे रहे हैं तो सरकार के पास नियमों का हवाला है। इससे फिलहाल किसी नतीजे पर पहुंच पाना आसान नहीं हैं। अहम बात इसमे ये है कि जहां विषयवार पेंच है वहीं बैकलॉग का भी एक एंगल है। अभ्यर्थी तो उनके मुताबिक सारा कुछ चाह रहे हैं लेकिन नियम सरकार को बाहर जाने की अनुमति नहीं देते हैं। आइए समझते हैं सारा समीकरण-
पहले जो पद रिक्त हैं उनके बारे में जानिए
दरअसल विभाग में सीधी भर्ती के तहत ज्यादातर रिक्त पद गणित और विज्ञान विषयों से संबंधित हैं। अब इस स्थिति में इन विशेष विषयों के पदों पर दूसरे विषयों के अभ्यर्थियों को नियुक्ति की पात्रता नहीं दी जा सकती।
बैकलॉग के पद भी बड़ी संख्या में खाली
वहीं दूसरी ओर अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध न होने के कारण बैकलॉग के पद भी बड़ी संख्या में खाली हैं। जबकि नियमों के अनुसार इन पदों पर अन्य प्रवर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति संभव नहीं है। उपलब्ध कुल रिक्त पदों में से करीब 59,000 पद पदोन्नति (Promotion) के लिए तय हैं। निर्धारित नियमों के अनुसार इन पदों पर सेवारत शिक्षकों को पदोन्नति देकर भरा जा सकता है।
आंदोलनकारी अभ्यर्थी स्वयं को बता रहे चयनित शिक्षक!
वहीं गौर करने वाली बात है कि प्रदर्शन कर रहे कई अभ्यर्थी खुद को चयनित शिक्षक बता रहे हैं, लेकिन उनके नाम न तो चयन सूची में हैं और न ही प्रतीक्षा सूची में। इसके अलावा एक और बात गौर करने वाली है कि पिछले 3 वर्षों में बड़ी संख्या में नए उम्मीदवारों ने आवश्यक शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता प्राप्त की है। ऐसे में नए योग्य युवाओं को होल्ड करके प्रदर्शन आधार पर नियुक्ति कैसे दे सकते हैं। मतलब कि जब चयन सूची में नाम ही नहीं हैं तो आंदोलनकारी स्वयं को चयनित शिक्षक कैसे बोल सकते हैं। नाम न चयन सूची में है और न प्रतीक्षा सूची में, तो नियुक्ति कैसे की जा सकती है।
अभ्यर्थियों की समस्याओं पर संवेदनशीलता जरूरी लेकिन नियम नजरअंदाज नहीं किए जा सकते
हालांकि अभ्यर्थियों की समस्याओं पर संवेदनशीलता से विचार करना जरूरी है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में विषयवार आवश्यकता, आरक्षण, पदोन्नति और पात्रता के नियमों का भी पालन भी बहुत जरूरी है। आंदोलनकारी अभ्यर्थी बेशक अपने पक्ष का हवाला दे रहे हैं और मंथन भी किया जाना चाहिए लेकिन जो चीजें नियमों से बंधी है उनसे कैसे पार पाया जाए।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस मुद्दे का हल बहुत गंभीर तरीके से सोचकर किया जाना चाहिए, लेकिन नियम, पात्रता, आरक्षण और सेवारत शिक्षकों के अधिकारों को भी चोट नहीं पहुंचनी चाहिए। यदि अभ्यर्थियों की मांग स्वीकार कर दिया जाए तो भर्ती प्रक्रिया के साथ ही नियमावली, आरक्षण व्यवस्था, विषयवार जरूरत से लेकर सेवारत शिक्षकों के अधिकार बहुत कुछ दांव पर लग जाएगा। इसलिए इस पेचीदगी को अभ्यर्थियों को समझना होगा।