बसंत पंचमी की देश भर में धूम, MP में बाबा महाकाल का गुलाल और फूलों से होता है श्रंगार

Edited By meena, Updated: 30 Jan, 2020 11:33 AM

bansat panchami is celebrated across the country

बसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन विद्या, बुद्धि और ज्ञानदायिनी की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। इसी दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत भी हो जाती है। बंसत पंचमी के दिन स्नान का भी खास महत्व माना...

भोपाल: बसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन विद्या, बुद्धि और ज्ञानदायिनी की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। इसी दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत भी हो जाती है। बंसत पंचमी के दिन स्नान का भी खास महत्व माना जाता है। बताया जाता है कि इस अवसर पर छोटे बच्‍चों की पढ़ाई का आरंभ करवाए जाने की भी परंपरा है। इसके अलावा विद्यार्थी, लेखक, कवि, गायक, वादक और साहित्‍य से जुड़े लोग भी इस दिन मां सरस्‍वती की पूजा करते हैं।

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बाबा महाकाल को चढ़ाया जाएगा गुलाल
मध्य प्रदेश में बाबा महाकाल में शहर के देवालयों में भी उत्सव की धूम रहेगी। उज्जैन में बाबा महाकाल को सुबह सरसों के फूलों से शृंगारित किया जाएगा, तो शाम को गुलाल चढ़ाई जाएगी। सांदीपनि आश्रम और गोपाल मंदिर में भगवान का पीतांबर शृंगार कर केसरिया भात चढ़ाया जाएगा। बताया जाता है कि बंसत से होली तक बाबा महाकाल को गुलाल चढ़ाया जाता है। इसी दिन से होली की शुरुआत भी हो जाती है।

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बसंत पचंमी कथा
इस दिन का अध्यात्मिक महत्व है बताया जाता है कि सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी ही मां सरस्वती थीं। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संसार की हर चीज में स्वर आ गया। इसीलिए उनका नाम देवी सरस्वती पड़ा। उस दिन माघ महीने का शुक्ल पक्ष था। तभी से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी।

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