मैं खुद को अपमानित महसूस कर रहा...कहकर भाजपा नेता ने दिया इस्तीफा, जानें पूरा मामला

Edited By meena, Updated: 06 May, 2026 02:41 PM

bjp councilor resigns in tikamgarh

मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में नगर पालिका की कार्यप्रणाली इन दिनों सवालों के घेरे में है। शहर की सरकार आपसी तालमेल की कमी के कारण कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। पहले अध्यक्ष पद को लेकर खींचतान रही...

टीकमगढ़  : मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में नगर पालिका की कार्यप्रणाली इन दिनों सवालों के घेरे में है। शहर की सरकार आपसी तालमेल की कमी के कारण कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। पहले अध्यक्ष पद को लेकर खींचतान रही, तो अब प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) के गठन के बाद वरिष्ठता और योग्यता को लेकर विवाद गहरा गया है। हाल ही में घोषित पीआईसी सूची के बाद एक भाजपा पार्षद ने खुद को अपमानित बताते हुए इस्तीफा दे दिया, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।

 

PunjabKesari

पूरा मामला 7 अप्रैल से जुड़ा है, जब नगर पालिका के तत्कालीन अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार को अनियमितताओं के आरोप में पद से हटा दिया गया था। इसके बाद भाजपा समर्थित पार्षदों ने अध्यक्ष पद पाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। शासन ने अंजली शर्मा को प्रशासक नियुक्त कर नगर पालिका की जिम्मेदारी सौंप दी। इस फैसले के बाद से ही पार्षदों और प्रशासक के बीच तालमेल बिगड़ता नजर आ रहा है।

भाजपा पार्षद घनश्याम उर्फ मुन्ना साहू ने पीआईसी से इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया कि समिति गठन में न तो वरिष्ठता का ध्यान रखा गया और न ही योग्यता का। उन्होंने पत्र में स्पष्ट लिखा कि वे खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं, इसलिए जिम्मेदारी से त्यागपत्र दे रहे हैं। उनके इस कदम के बाद नगर पालिका में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है और अन्य पार्षदों में भी नाराजगी देखी जा रही है।

स्थिति इतनी बिगड़ गई कि 29 अप्रैल को प्रशासक द्वारा बुलाई गई बैठक का पार्षदों ने बहिष्कार कर दिया। मामला बढ़ते-बढ़ते कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय तक पहुंचा। इसके बाद 2 मई को सर्किट हाउस में बैठक आयोजित की गई, जिसमें भाजपा जिलाध्यक्ष सरोज राजपूत, जिला प्रभारी पुष्पेन्द्र गुड्डन पाठक, प्रशासक अंजली शर्मा और अन्य पार्षद शामिल हुए। बैठक में विकास कार्यों को सुचारू रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति बनी, हालांकि विपक्ष के नेता अभिषेक खरे रानू इसमें शामिल नहीं हुए।

4 मई को देर शाम पीआईसी सदस्यों की सूची जारी की गई, जिसमें कई भाजपा पार्षदों और कांग्रेस से भाजपा में आए पार्षदों को जिम्मेदारियां दी गईं। इसके बाद ही विवाद और गहरा गया। कांग्रेस नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाए। ब्लॉक अध्यक्ष अनीस खान ने आरोप लगाया कि प्रशासक ने सिर्फ भाजपा पार्षदों को प्राथमिकता दी और कांग्रेस पार्षदों के साथ भेदभाव किया।

अब हालात ऐसे बन गए हैं कि नगर पालिका में विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। लगातार बढ़ती नाराजगी और आपसी खींचतान से यह सवाल खड़ा हो गया है कि बिना समन्वय के शहर की व्यवस्था सुचारू रूप से कैसे चल पाएगी।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!