कलेक्टर नहीं आईं तो भड़के BJP विधायक: बोले- ‘मुर्दाबाद भी लगाना आता है’, सीढ़ियों पर बैठकर किया प्रदर्शन

Edited By Himansh sharma, Updated: 04 Apr, 2026 06:26 PM

bjp mla sits on steps warns of murdabad slogans

मध्य प्रदेश के रतलाम कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार को उस समय माहौल गर्मा गया, जब चिंतामणी मालवीय किसानों के साथ सीढ़ियों पर ही धरने पर बैठ गए।

रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार को उस समय माहौल गर्मा गया, जब चिंतामणी मालवीय किसानों के साथ सीढ़ियों पर ही धरने पर बैठ गए। मामला उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड सड़क परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीनों के मुआवजे से जुड़ा है, जिसे लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। आलोट विधानसभा के 8 गांवों के किसान लंबे समय से बाजार दर के मुकाबले बेहद कम मुआवजा दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर विधायक मालवीय सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गए और अधिकारियों को बाहर बुलाने की मांग पर अड़ गए। जब प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें चेंबर में चर्चा के लिए बुलाना चाहा, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया और कहा कि “जनता की बात जनता के बीच ही सुनी जानी चाहिए।

करीब 15 मिनट तक इंतजार के बाद विधायक ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि अभी तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण है, लेकिन जरूरत पड़ी तो आंदोलन का स्वर बदल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि “अभी जिंदाबाद के नारे लग रहे हैं, लेकिन हालात नहीं सुधरे तो मुर्दाबाद के नारे भी लगाना हमें आता है। स्थिति को गंभीर होता देख कलेक्टर मिशा सिंह को स्वयं चेंबर से बाहर आकर सीढ़ियों पर बैठे किसानों और विधायक से चर्चा करनी पड़ी। इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल को चेंबर में बुलाकर करीब 10 मिनट तक बातचीत की गई। बैठक के बाद कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि प्रभावित 8 गांवों का क्लस्टर बनाकर मुआवजे के मामले का दोबारा अध्ययन किया जाएगा, ताकि किसानों को अधिकतम संभव दर मिल सके।

मुआवजे पर बड़ा विवाद

विधायक और किसान संगठनों का कहना है कि प्रशासन द्वारा तय किया गया मुआवजा ₹2.20 लाख से ₹2.50 लाख प्रति बीघा है, जो वास्तविक बाजार मूल्य से कहीं कम है। किसानों के अनुसार, दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर और प्रस्तावित 8-लेन सड़क के आसपास होने के कारण इन जमीनों की कीमत ₹80 लाख से ₹1.5 करोड़ प्रति बीघा तक है। विधायक मालवीय ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों के हितों से समझौता भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध है।

किसानों की प्रमुख मांगें

किसानों ने मुआवजे को लेकर कई अहम मांगें रखी हैं—

मुआवजा हालिया रजिस्ट्री दरों के आधार पर तय किया जाए ,जिन गांवों में रजिस्ट्री नहीं हुई, वहां पास के उच्च दर वाले गांव को आधार बनाया जाए ,भविष्य की संभावित कीमत और उपयोग को ध्यान में रखा जाए, उज्जैन और इंदौर की तर्ज पर समान मुआवजा नीति लागू की जाए..

फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद मामला शांत जरूर हुआ है, लेकिन यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।

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