प्रभावशाली नेताओं की कृपा से पोस्ट पाने वाले पदाधिकारियों पर गिरेगी गाज! BJP नेतृत्व अब इस काम में जुटा

Edited By Desh Raj, Updated: 11 Aug, 2026 11:45 PM

bjp on alert office bearers appointed through influence of senior leaders

मध्य प्रदेश में बीजेपी पार्टी सत्ता में है । सत्ता में होने के बावजूद भाजपा संगठन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दरअसल पार्टी के कुछ प्रभावशाली नेताओं के कथित प्रभाव और उनके समर्थकों को संगठन में महत्वपूर्ण पद दिलाने की रणनीति से दिक्कत होने लगी...

(डेस्क): मध्य प्रदेश में बीजेपी पार्टी सत्ता में है । सत्ता में होने के बावजूद भाजपा संगठन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दरअसल पार्टी के कुछ प्रभावशाली नेताओं के कथित प्रभाव और उनके समर्थकों को संगठन में महत्वपूर्ण पद दिलाने की रणनीति से दिक्कत होने लगी है। यह प्रदेश नेतृत्व के लिए चिंता का कारण बनती दिखाई दे रही है। सूत्रों और जानकारों के मुताबिक, प्रदेश के करीब 10 जिलों में संगठन की मौजूदा स्थिति को लेकर अंदरुनी स्तर पर आकलन कराया गया है।

इस आकलन में कई जिलों में संगठन की पकड़ कमजोर होने, बूथ स्तर पर सक्रियता घटने के साथ ही स्थानीय स्तर पर नेताओं की स्वीकार्यता कम होने की बात का दावा किया जा रहा है। दरअसल दतिया उपचुनाव के बाद  सामने आए घटनाक्रम को देखते हुए प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने दूसरे जिलों में भी संगठन की असली स्थिति को समझने में जुट गया है।

अंदरूनी आकलन में यह बात सामने आ रही है कि जिन जिलों में प्रभावशाली नेताओं की पसंद के लोगों को को  पोस्ट देकर संगठन की कमान दी गई है वहां पर संगठनात्मक गतिविधियां उस स्तर की नहीं पाई गई। बूथ इकाइयों की सक्रियता से लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय तक को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

भाजपा में यह चर्चा रही है कि जिलाध्यक्षों और संगठन के कई महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों में कुछ वरिष्ठ नेताओं का प्रभाव रहता है।  कई बार स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं की पसंद के बजाय प्रभावशाली नेताओं की पसंद को ही तरजीह दी जाती है। इसके बावजूद कुछ जिलों में ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है, जिनका संगठनात्मक अनुभव अपेक्षाकृत कम रहा है। साथ ही ऐसे आरोप भी हैं कि ऐसे जिलाध्यक्ष कई मामलों में संगठनात्मक निर्णयों से ज्यादा अपने नेता की राय को महत्व देते हैं। इससे कार्यकर्ताओं में असंतोष और संगठन की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।

लिहाजा अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां को लेकर प्रदेश नेतृत्व अब केवल जिलाध्यक्षों की रिपोर्ट के बजाय जमीनी स्तर की धरातल पर स्थिति जानने की दिशा में कवायद शुरु कर दी है ।

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