Edited By meena, Updated: 10 Aug, 2026 09:31 PM

दतिया उपचुनाव के बाद भाजपा औऱ कांग्रेस अपने अगले लक्ष्य के लिए जुट चुके हैं। अब दोनों पार्टियों की नजर अगले मकसद पर है...
डेस्क: दतिया उपचुनाव के बाद भाजपा औऱ कांग्रेस अपने अगले लक्ष्य के लिए जुट चुके हैं। अब दोनों पार्टियों की नजर अगले मकसद पर है। दरअसल मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2028 से पहले भाजपा अपनी चुनावी तैयारियों को अमलीजामा पहनाने पर जुट गई हैं। भाजपा ने अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को विधानसभा चुनाव से पहले की बड़ी परीक्षा मानते हुए तैयारी शुरू कर दी है।
भाजपा नए और युवा चेहरों पर लगाएगी दांव
दरअसल,भाजपा की रणनीति इस बार चेंज है, इस बार सबसे बड़ा बदलाव नए और युवा चेहरों को आगे लाने का है। पार्टी स्तर पर विचार किया जा रहा है कि 30 से 50 वर्ष आयु वर्ग वाले नेताओं को पार्षद पद के लिए अधिक अवसर दिए जाएं। जबकि महापौर और अध्यक्ष पद के लिए 60 वर्ष से कम उम्र के चेहरों पर दांव लगाया जाए। इसके साथ ही पार्टी गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को भी चुनावी समर में मौका देने की सोच रही है। 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में महापौर के साथ नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों के चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने की प्रक्रिया तय की गई है।
दरअसल, भाजपा के सामने बड़ी चुनौती उन निकायों में है, जहां वर्तमान अध्यक्षों और पार्षदों को लेकर असंतोष की स्थिति बनी है। पार्टी का मानना है कि लंबे समय से पदों पर रहे इन चेहरों के खिलाफ एंटी-इनकमबेंसी की लहर हो सकती है। इसी के चलते 30 से 50 वर्ष आयु वर्ग के नेताओं को पार्षद पदों पर प्राथमिकता देने और अध्यक्ष-महापौर के लिए युवा चेहरों पर मंथन चल रहा है।
इसके साथ ही भाजपा की रणनीति में गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को निकाय चुनाव में मौके देना भी शामिल है। लिहाजा अभी से संभावित उम्मीदवारों और समीकरणों क ध्यान में देखते हुए पार्टी संगठन इस काम में लग चुका है।इस बदली हुई रणनीती से बीजेपी फिर से कांग्रेस को पटखनी देने की कोशिश में है।