Edited By Vikas Tiwari, Updated: 13 Apr, 2026 07:56 PM

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा नदी को जीवनदायिनी बताते हुए उसके संरक्षण के लिए शासन और समाज के बीच समन्वय को आवश्यक बताया है। उन्होंने अमरकंटक में आयोजित नर्मदा समग्र मिशन की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि नर्मदा उद्गम स्थल के...
अमरकंटक: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा नदी को जीवनदायिनी बताते हुए उसके संरक्षण के लिए शासन और समाज के बीच समन्वय को आवश्यक बताया है। उन्होंने अमरकंटक में आयोजित नर्मदा समग्र मिशन की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि नर्मदा उद्गम स्थल के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं तथा नदी तटों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निरंतर जारी रखी जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरकंटक की पवित्रता और प्राकृतिक स्वरूप बनाए रखने के लिए अनियंत्रित निर्माण पर सख्ती से रोक लगाई जाए। उन्होंने ‘नो कंस्ट्रक्शन’ और ‘नो मूवमेंट’ जोन निर्धारित करने के निर्देश भी दिए, साथ ही प्लास्टिक और शराब के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की बात कही। बैठक में वन संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रजातियों जैसे साल, महुआ, आंवला, हर्रा आदि के पौधरोपण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने जानकारी दी कि क्षेत्र में 2.5 लाख से अधिक पौधे रोपण के लिए उपलब्ध हैं और प्राकृतिक वनों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने नर्मदा नदी में प्रदूषण रोकने, अपशिष्ट जल प्रबंधन और सीवरेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि अमरकंटक में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा चुका है, जिससे प्रदूषित जल को नदी में जाने से रोका जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमरकंटक एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है, जहां निर्माण कार्यों को नियमानुसार नियंत्रित करना आवश्यक है। प्रशासन को निर्देश दिए गए कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर समय-समय पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।