Edited By Himansh sharma, Updated: 12 Jul, 2026 11:48 AM

मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा के भीतर शुरू हुआ असंतोष अभी शांत होता नजर नहीं आ रहा है।
दतिया। मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा के भीतर शुरू हुआ असंतोष अभी शांत होता नजर नहीं आ रहा है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के एक वर्ग में नाराजगी बनी हुई है। संगठन लगातार हालात सामान्य करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन विरोध कर रहे कार्यकर्ता फिलहाल अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं।
शनिवार को भाजपा के चंबल संभाग के प्रभारी अभयप्रताप सिंह दतिया पहुंचे और जिला भाजपा कार्यालय में नाराज कार्यकर्ताओं से चर्चा कर उन्हें पार्टी के निर्णय के साथ चलने की समझाइश दी। हालांकि बैठक के दौरान कई कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की और स्पष्ट कहा कि यदि उम्मीदवार नहीं बदला गया तो उपचुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बैठक में मौजूद समर्थकों ने टिकट चयन को लेकर अपनी आपत्तियां रखते हुए नेतृत्व से पुनर्विचार की मांग की। सूत्रों के अनुसार, कार्यकर्ताओं की नाराजगी कम होती नहीं दिखी, जिसके बाद प्रदेश प्रभारी कुछ समय बाद कार्यालय से रवाना हो गए। इससे साफ संकेत मिला कि दतिया में टिकट को लेकर बना असंतोष अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
इसी दौरान पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा भी भाजपा कार्यालय पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उम्मीदवार तय करना पार्टी का अधिकार है और सभी कार्यकर्ताओं को संगठन के फैसले का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने हाल के विरोध प्रदर्शनों में सामने आए पेट्रोल और डीजल डालकर प्रदर्शन करने जैसे वीडियो का भी उल्लेख किया और कार्यकर्ताओं से ऐसी गतिविधियों से दूर रहने की अपील की।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि लोकतांत्रिक दलों में अपनी बात रखने के लिए संगठन के भीतर निर्धारित मंच मौजूद हैं। असहमति व्यक्त करने का तरीका अनुशासित होना चाहिए। उन्होंने समर्थकों से कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाले किसी भी कदम से बचने और संयम बनाए रखने का आग्रह किया।
उधर, दतिया उपचुनाव का चुनावी कार्यक्रम भी तय हो चुका है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई है, जबकि 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवार 16 जुलाई तक अपने नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 30 जुलाई को होगा और मतगणना 3 अगस्त को की जाएगी। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की होगी।