धार में भारी तनाव! प्रशासन ने वराह मार्च की नहीं दी अनुमति, कई पदाधिकारी गिरफ्तार

Edited By meena, Updated: 15 Sep, 2026 04:29 PM

dhar administration denies permission for  varaha march  several office bearers

मध्यप्रदेश के धार शहर में सनातन प्रहरी समिति द्वारा प्रस्तावित वराह मार्च को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए आयोजन की अनुमति निरस्त कर दी है...

धार : मध्यप्रदेश के धार शहर में सनातन प्रहरी समिति द्वारा प्रस्तावित वराह मार्च को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए आयोजन की अनुमति निरस्त कर दी है। शहर में लगाए गए प्रचार होर्डिंग्स भी हटवा दिए गए हैं। तनाव की स्थिति को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने गंजीखाना स्थित पुरातत्व संरक्षित इमारत को मंगलवार को पूर्णत: बंद रखने का आदेश दिया है। वहीं पुलिस ने मंगलवार सुबह मार्च से जुड़े कई प्रमुख पदाधिकारियों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया है।

सीएसपी शशांक सिंह गुर्जर के अनुसार सुरक्षा की द्दष्टि से आयोजन की अनुमति रद्द कर दी गई है। उन्होंने शहरवासियों से शांति बनाए रखने और घरों में रहने की अपील की है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत दो दर्जन थाना प्रभारी, 10 एसडीओपी एवं डीएसपी स्तर के अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। पीजी कॉलेज ग्राउंड सहित शहर के प्रमुख चौराहों पर फिक्स पुलिस पिकेट लगाए गए हैं और मोबाइल वैन लगातार गश्त कर रही हैं। एएसआई ने आदेश जारी कर गंजीखाना स्थित पुरातत्व संरक्षित इमारत को मंगलवार को आमजन के लिए पूरी तरह बंद रखने की सूचना चस्पा की है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत किसी भी अनधिकृत प्रवेश या गतिविधि पर दंडात्मक कारर्वाई की जाएगी। प्रशासन की सख्ती के बीच पुलिस ने मंगलवार सुबह आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया। इनमें विकास जाट, लोकेश यादव, आशीष बसु, सत्यनारायण रघुवंशी उर्फ टू-टू ठाकुर, संदीप यादव, बाला उफर् विक्रम निवासी वीर सावरकर मार्ग, बाला उर्फ स्वप्निल सितौले, दीपक उर्फ रोहित सांठे तथा सत्यनारायण पिता सुखराम निवासी धामनोद शामिल हैं। इस ऐतिहासिक स्थल को हिंदू पक्ष ‘विजय मंदिर' और मुस्लिम समाज ‘लाट मस्जिद' के रूप में जानता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में परमार वंश के राजा भोज ने कराया था और इसके बाहर विशाल लोह स्तंभ (लाट) स्थित है। स्वतंत्रता पूर्व से एएसआई संरक्षित इस स्थल पर पूर्व व्यवस्था के तहत मुस्लिम पक्ष को दोनों ईदों पर नमाज तथा हिंदू समाज को दशहरे के अगले दिन मिलन समारोह की अनुमति रहती थी।

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