Edited By Himansh sharma, Updated: 15 Jul, 2026 03:53 PM

मध्य प्रदेश के ग्वालियर के जीआर मेडिकल कॉलेज और जयारोग्य अस्पताल (JAH) समूह के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है।
ग्वालियर (अंकुर जैन): मध्य प्रदेश के ग्वालियर के जीआर मेडिकल कॉलेज और जयारोग्य अस्पताल (JAH) समूह के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। छतरपुर के 14 वर्षीय किशोर के मस्तिष्क और पैर में धंसे त्रिशूल को डॉक्टरों ने बेहद जटिल ऑपरेशन के जरिए सुरक्षित निकालकर उसकी जान बचा ली। कई विभागों के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। अब किशोर पूरी तरह स्वस्थ है।
यह मामला छतरपुर जिले के किशनगढ़ क्षेत्र का है। 14 वर्षीय शिवम माता की मढ़िया परिसर में खेल रहा था। इसी दौरान वह ऊंचाई से नीचे रखे त्रिशूल पर गिर गया। हादसा इतना भयावह था कि त्रिशूल का एक सिरा उसकी बाईं आंख के रास्ते मस्तिष्क में जा पहुंचा, जबकि दूसरा सिरा उसके बाएं पैर में धंस गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में उसे तत्काल ग्वालियर के जेएएच ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।
ग्वालियर पहुंचते ही डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए मरीज की सीटी स्कैन, सीटी एंजियोग्राफी समेत सभी आवश्यक जांचें कराईं। रिपोर्ट आने के बाद न्यूरोसर्जरी और जनरल सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से मामले का अध्ययन किया और बेहद सावधानी से ऑपरेशन की विस्तृत रणनीति तैयार की। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि त्रिशूल को इस तरह निकाला जाए, जिससे मस्तिष्क, आंख और नसों को कोई अतिरिक्त नुकसान न पहुंचे।
26 जून को प्रोफेसर डॉ. अविनाश शर्मा के नेतृत्व में न्यूरोसर्जरी और जनरल सर्जरी की संयुक्त टीम ने कई घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया। ऑपरेशन के दौरान त्रिशूल को बेहद सावधानी से बाहर निकाला गया। साथ ही संभावित रक्तस्राव और संक्रमण के खतरे को भी पूरी तरह नियंत्रित किया गया।
सर्जरी के बाद सबसे राहत की बात यह रही कि शिवम पूरी तरह होश में है। उसके हाथ-पैर सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और उसकी आंखों की रोशनी भी सुरक्षित है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह ऑपरेशन आधुनिक चिकित्सा तकनीक, सटीक पूर्व-योजना, विभिन्न विभागों के समन्वय और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि समय पर उपचार और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम असंभव लगने वाले मामलों को भी सफल बना सकती है।