Edited By Himansh sharma, Updated: 16 Jul, 2026 11:04 AM

मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में पहचान की चोरी और कथित फर्जी नियुक्ति का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
शहडोल। (कैलाश लालवानी): मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में पहचान की चोरी और कथित फर्जी नियुक्ति का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने अपने ही रिश्ते के भतीजे के शैक्षणिक दस्तावेजों का उपयोग कर खुद को डॉक्टर बताया और सरकारी सेवा में मेडिकल ऑफिसर के रूप में नियुक्ति हासिल कर ली। इतना ही नहीं, वह वर्षों तक सरकारी वेतन भी लेता रहा। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि उसका नाम एक साथ तीन अलग-अलग जिलों के रिकॉर्ड में दर्ज था।
लोकायुक्त की कार्रवाई से खुली परतें
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब रीवा लोकायुक्त की टीम ने शहडोल जिले के जयसिंहनगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ बताए जा रहे मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेश चंद्र शर्मा को कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। कार्रवाई के बाद जब दस्तावेजों और पहचान की जांच शुरू हुई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
राजस्थान के असली डॉक्टर ने दर्ज कराई शिकायत
लोकायुक्त कार्रवाई की खबर सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में आने के बाद राजस्थान के भरतपुर निवासी वास्तविक डॉ. महेश चंद्र शर्मा शहडोल पहुंचे। उन्होंने जयसिंहनगर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि वे वर्षों से राजस्थान के डीग जिले के पूछरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने समाचारों में अपना नाम और तस्वीर देखी तो वे हैरान रह गए। जांच करने पर पता चला कि मध्य प्रदेश में कोई अन्य व्यक्ति उनकी पहचान का उपयोग कर सरकारी नौकरी कर रहा था।
भतीजे के दस्तावेजों का दुरुपयोग करने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रिश्ते के चाचा सतीश शर्मा ने भतीजे के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और अन्य दस्तावेजों का कथित रूप से दुरुपयोग कर खुद को डॉक्टर के रूप में प्रस्तुत किया। परिवार के अधिकांश सदस्यों को भी इस बात की जानकारी नहीं थी। उन्हें बताया जाता था कि वह कोटा में कोचिंग का काम करते हैं।
तीन जिलों में एक साथ पोस्टिंग का खुलासा
जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब संबंधित व्यक्ति का नाम शहडोल, श्योपुर और खरगोन तीनों जिलों के पदस्थापना रिकॉर्ड में मिला। दस्तावेजों के अनुसार फरवरी 2023 से खरगोन जिले के सेगांव ब्लॉक में भी उसकी नियुक्ति दर्ज थी।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि एक ही व्यक्ति अलग-अलग जिलों में एक साथ कैसे पदस्थ रहा, उसकी उपस्थिति किस प्रकार दर्ज होती रही और सरकारी वेतन का भुगतान किन प्रक्रियाओं के तहत किया जाता रहा।
स्वास्थ्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन प्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह जांच का विषय है कि नियुक्ति के समय मूल दस्तावेजों और पहचान का सत्यापन किस स्तर पर किया गया और इस कथित फर्जीवाड़े में किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।
पुलिस ने शुरू की जांच
जयसिंहनगर थाना प्रभारी अजय बैगा ने बताया कि वास्तविक डॉ. महेश चंद्र शर्मा की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही है। संबंधित विभागों से रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।