अपने जिले में सुनवाई नहीं हुई तो 150 किलोमीटर सफर तय करके भोपाल पहुंचा बेबस किसान, दंग रह गए कमिश्नर

Edited By Desh Raj, Updated: 20 Jul, 2026 07:23 PM

farmer reached bhopal after covering a distance of 150 kilometers

राजगढ़ जिले की खिलचीपुर तहसील से अपनी जमीन पर कथित अवैध कब्जे की शिकायत लेकर एक किसान भोपाल स्थित संभाग आयुक्त कार्यालय पहुंचा। किसान गिरधारी पिता रामा वर्मा की फरियाद सुनते ही संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया

भोपाल (इजहार खान): राजगढ़ जिले की खिलचीपुर तहसील से अपनी जमीन पर कथित अवैध कब्जे की शिकायत लेकर एक किसान भोपाल स्थित संभाग आयुक्त कार्यालय पहुंचा। किसान गिरधारी पिता रामा वर्मा की फरियाद सुनते ही संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को प्रकरण का शीघ्र परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए शिकायत का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा की संवेदनशीलता इस मामले में सराहनीय है। 150 किलोमीटर दूर से अपनी समस्या लेकर पहुंचे किसान की परेशानी को उन्होंने समझा, उसकी बात गंभीरता से सुनी और तत्काल अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। एक परेशान फरियादी के प्रति एक वरिष्ठ अधिकारी का यह रवैया प्रशासन की संवेदनशीलता की मिसाल पेश करता है।

कमिश्नर की इस संवेदनशील पहल के बीच एक बड़ा सवाल राजगढ़ जिले की स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर भी खड़ा होता है। आखिर किसान को अपनी जमीन की शिकायत लेकर खिलचीपुर से भोपाल तक क्यों आना पड़ा? क्या उसकी समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर नहीं हो पा रहा था? क्या किसान ने इससे पहले स्थानीय अधिकारियों से गुहार लगाई थी? अगर लगाई थी तो उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई? इन सवालों के जवाब सामने आना अभी बाकी हैं।

किसान गिरधारी राजगढ़ जिले की खिलचीपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बाड़िया का रहने वाला है। उसने संभागायुक्त के सामने अपनी भूमि पर कथित अवैध कब्जे की शिकायत रखी। कमिश्नर ने शिकायत सुनने के बाद अधिकारियों को मामले की जांच और नियमानुसार कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए।

सवाल यह है कि जिस समस्या के समाधान के लिए कमिश्नर ने किसान की फरियाद सुनते ही अधिकारियों को निर्देश दे दिए, क्या उसी समस्या का निराकरण स्थानीय स्तर पर पहले नहीं किया जा सकता था? आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां थीं कि एक किसान को अपनी फरियाद लेकर जिला और तहसील स्तर से आगे संभागीय मुख्यालय भोपाल तक पहुंचना पड़ा? हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि किसान ने इससे पहले किन-किन अधिकारियों के समक्ष शिकायत की थी और स्थानीय स्तर पर उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई। ऐसे में स्थानीय प्रशासन की लापरवाही पर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन किसान का अपनी शिकायत लेकर सीधे भोपाल पहुंचना स्थानीय शिकायत निवारण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल जरूर खड़ा करता है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा के निर्देश के बाद किसान की शिकायत का निराकरण कितनी जल्दी होता है और जमीन पर कथित अवैध कब्जे के मामले में जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।

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