Edited By Desh sharma, Updated: 06 Jan, 2026 07:25 PM

छतरपुर जिला मुख्यालय पर मंगलवार को आयोजित जिला स्तरीय जनसुनवाई में उस वक्त हड़कंप मच गया जब छतरपुर तहसील क्षेत्र के काशीपुरा गांव से दर्जनों किसान मुंह पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करने पहुंचे।
छतरपुर (राजेश चौरसिया): छतरपुर जिला मुख्यालय पर मंगलवार को आयोजित जिला स्तरीय जनसुनवाई में उस वक्त हड़कंप मच गया जब छतरपुर तहसील क्षेत्र के काशीपुरा गांव से दर्जनों किसान मुंह पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करने पहुंचे। छतरपुर की कांग्रेस नेत्री दीप्ती पाण्डेय के नेतृत्व में आए इन किसानों ने सूखा और अतिवृष्टि राहत राशि के वितरण में हुई करोड़ों की धोखाधड़ी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपर जिला मजिस्ट्रेट मिलिन्द नागदेवे और डिप्टी कलेक्टर विशा माधवानी को ज्ञापन सौंपा।
कांग्रेस नेत्री दीप्ती पाण्डेय के नेतृत्व में आए किसान
किसानों का आरोप है कि वर्ष 2017-18 में उनके हक का पैसा अधिकारियों और पटवारियों ने मिलीभगत कर अपात्रों के खातों में डाल दिया, जिसकी पुष्टि स्वयं भारत सरकार की सबसे बड़ी ऑडिट संस्था कैग, अपनी रिपोर्ट में कर चुकी है।
इस मामले में कांग्रेस नेत्री दीप्ती पाण्डेय ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि इस घोटाले की जांच के लिए कलेक्टर द्वारा 22 सितंबर 2025 को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी, जिसे 15 दिनों में रिपोर्ट देनी थी। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी जांच कमेटी के प्रमुख एसएलआर आदित्य सोनकिया का कहना है कि तहसील कार्यालय उन्हें आवश्यक अभिलेख ही उपलब्ध नहीं करा रहा है।
दीप्ती पाण्डेय ने आरोप लगाया कि जब उन्हें सूचना के अधिकार के तहत ये दस्तावेज मिल सकते हैं, तो कलेक्टर के आदेश पर जांच कमेटी को दस्तावेज न मिलना सीधे तौर पर तहसील अमले की मिलीभगत और भ्रष्टाचार को दबाने की कोशिश दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि तहसीलदारों ने ही कलेक्टर के आदेशों को मानना बंद कर दिया है, तो आम जनता की सुनवाई कैसे होगी।
आपको बता दें कि राहत राशि घोटाले का यह मामला नया नहीं है। वर्ष 2022 में आई कैग की रिपोर्ट ने छतरपुर जिले के राजस्व विभाग में मचे भ्रष्टाचार की कलई खोल दी थी। रिपोर्ट में स्पष्ट प्रमाण दिए गए थे कि पटवारियों और राजस्व अधिकारियों ने किसानों के मुआवजे की राशि अपने रिश्तेदारों और चहेतों के खातों में जमा करा दी थी।
इस धोखाधड़ी का शिकार हुए किसान हल्लू अहिरवार ने बताया कि उनके हिस्से के 9 हजार रुपये किसी और के खाते में भेज दिए गए हैं। इसी तरह अशिक्षित किसान घनश्यामदास कुशवाहा के 5 हजार रुपये भी डकार लिए गए हैं। काशीपरुा गांव के रामदयाल कुशवाहा, हरप्रसाद और गनेशी बाई जैसे अनेक किसान आज भी अपने हक की राशि के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
कांग्रेस नेत्री दीप्तिी पांडे ने बताया कि धोखाधड़ी का यह जाल केवल एक-दो गांवों तक सीमित नहीं है। छतरपुर तहसील के नंदगॉयखुर्द, खैरों, पापटा, लुंदवास, मानपुरा और बिहारीगंज सहित लगभग 50 से अधिक गांवों के पटवारी हल्कों में इसी तरह फर्जी भुगतान किए गए हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि इसी तरह के मामलों में प्रदेश के अन्य जिलों में दोषी पटवारियों को बर्खास्त कर प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, लेकिन छतरपुर में प्रशासन दोषियों को संरक्षण दे रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के हस्तक्षेप और राहत शाखा आयुक्त के पत्रों के बावजूद जिला प्रशासन की जांच कछुआ गति से चल रही है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।