Edited By Himansh sharma, Updated: 10 Apr, 2026 09:19 PM

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।
धमधा, दुर्ग (हेमंत पाल): छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। यहां अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों की बढ़ती संख्या ने पूरे क्षेत्र को जोखिम में डाल दिया है। बिना वैध डिग्री और पंजीयन के खुद को डॉक्टर बताने वाले लोग खुलेआम इलाज कर रहे हैं, जिससे न सिर्फ डॉक्टरी पेशे की गरिमा प्रभावित हो रही है, बल्कि आम जनता के जीवन के साथ भी गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में कथित डिग्रीधारी और झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ आ गई है। ये लोग अपने घरों को ही क्लीनिक और छोटे अस्पताल के रूप में संचालित कर रहे हैं। यहां तक कि कई जगहों पर मरीजों को भर्ती कर गंभीर बीमारियों का इलाज भी किया जा रहा है, जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ है।
कागजों में कार्रवाई, जमीनी स्तर पर सन्नाटा
प्रशासन की ओर से अवैध क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई के कई दावे किए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय द्वारा जांच के निर्देश जारी किए गए, समितियां भी बनाई गईं, लेकिन इन सबके बावजूद धरातल पर कोई ठोस परिणाम देखने को नहीं मिला है। सूत्रों का कहना है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। कई बार शिकायतों के बावजूद न तो क्लीनिकों पर ताला लगा और न ही संचालकों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की गई। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कमीशनखोरी का खेल, मरीजों का शोषण
जानकारी के अनुसार, कई अवैध क्लीनिक संचालक मरीजों को बड़े निजी अस्पतालों में कमीशन के आधार पर रेफर करते हैं। इस प्रक्रिया में मरीजों से मोटी रकम वसूली जाती है। इलाज के नाम पर आर्थिक शोषण का यह खेल लंबे समय से जारी है। गरीब और ग्रामीण परिवार, जो बेहतर इलाज की उम्मीद में इन क्लीनिकों तक पहुंचते हैं, वे न सिर्फ गलत इलाज का शिकार होते हैं बल्कि कर्ज के बोझ तले भी दब जाते हैं।
ठेंगाभाठा की घटना ने खोली पोल
ग्राम ठेंगाभाठा में एक गंभीर मामला सामने आया, जहां एक बाहरी कथित डॉक्टर द्वारा गलत इलाज के चलते एक महिला की मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी डॉक्टर फरार हो गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले में भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती दिखाई जाती, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था। जनता में बढ़ता आक्रोश क्षेत्र के लोगों में प्रशासन के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अवैध क्लीनिकों का यह जाल दिन-ब-दिन फैलता जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
बड़ा हादसा होने की आशंका
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना प्रशिक्षित और अप्रमाणित लोगों द्वारा इलाज किया जाना बेहद खतरनाक है। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। यदि समय रहते इन अवैध क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में और गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेगा या फिर जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाकर अवैध क्लीनिकों के इस नेटवर्क को खत्म करेगा। धमधा क्षेत्र की जनता को अब ठोस कार्रवाई का इंतजार है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में भरोसा कायम हो सके और लोगों की जान के साथ हो रहा खिलवाड़ बंद हो।