Edited By Himansh sharma, Updated: 27 May, 2026 05:08 PM

मध्य प्रदेश के इंदौर भाजपा में किसान मोर्चा नगर अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।
इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर भाजपा में किसान मोर्चा नगर अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। संगठन के भीतर अब यह मामला सिर्फ एक पद तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भविष्य की राजनीतिक रणनीति और प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक किसान मोर्चा प्रदेश नेतृत्व अपनी पसंद के चेहरे को आगे बढ़ाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है, जबकि इंदौर के कुछ प्रभावशाली विधायक और स्थानीय नेता अलग नाम पर सहमति बनाते नजर आ रहे हैं। इसी वजह से नियुक्ति को लेकर खींचतान खुलकर सामने आने लगी है।
चर्चा है कि प्रदेश स्तर पर एक नाम को लेकर सक्रियता दिखाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नेताओं का तर्क है कि लंबे समय से संगठन में काम कर रहे और जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका मिलना चाहिए। इस खींचतान के बीच तीन बार संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा चुके एक वरिष्ठ पदाधिकारी का नाम भी मजबूती से सामने रखा गया है।
दिलचस्प बात यह है कि दावेदारी के बीच ‘किसान प्रतिनिधित्व’ का मुद्दा भी उठाया जा रहा है। विरोधी गुट सवाल कर रहा है कि यदि किसान पृष्ठभूमि ही प्रमुख मानदंड है तो यह कसौटी पहले की नियुक्तियों में क्यों लागू नहीं हुई।
उधर, समीकरणों के बीच एक तीसरा नाम भी चर्चा में आ गया है, जिसे सामाजिक संतुलन और स्थानीय प्रभाव के लिहाज से मजबूत विकल्प माना जा रहा है। अब निगाहें इस पर हैं कि संगठन अनुभव को प्राथमिकता देता है या राजनीतिक संतुलन को। फिलहाल इंदौर भाजपा के गलियारों में एक ही चर्चा है - किसान मोर्चे की कमान किसके हाथ जाएगी और इस फैसले का असर आने वाले संगठनात्मक समीकरणों पर कितना पड़ेगा।