Edited By Himansh sharma, Updated: 09 Sep, 2026 03:42 PM

अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है - क्या जबलपुर में यह सिर्फ MRP से ज्यादा कीमत वसूले जाने की कार्रवाई का मामला है
जबलपुर। शहर में 26 शराब दुकानों पर MRP से अधिक कीमत वसूले जाने के आरोपों को लेकर आबकारी विभाग की कार्रवाई के बीच अब सिंधी कैंप शराब दुकान से जुड़े करीब ₹1.40 करोड़ के कथित सरकारी बकाया का मामला भी चर्चा में आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आबकारी विभाग की कार्रवाई और सोशल मीडिया पर चल रहे आरोप-प्रत्यारोप ने मामले को और गरमा दिया है।आबकारी विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में सिंधी कैंप शराब दुकान का संचालन कांग्रेस नेता विजय रजक से जुड़े व्यक्ति के नाम पर होने की बात सामने आई है। निर्धारित लाइसेंस फीस समय पर जमा नहीं होने के बाद दुकान की पुनर्नीलामी की कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया के चलते शासन को करीब ₹1.40 करोड़ के वित्तीय नुकसान का मामला बना है। इसी कथित बकाया राशि की वसूली के लिए संबंधित ठेकेदार के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया चलने की बात कही जा रही है। हालांकि, राशि और वसूली की वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड से होना बाकी है।
MRP विवाद के बीच सोशल मीडिया अभियान पर भी सवाल
इसी बीच आबकारी विभाग पर MRP से अधिक कीमत वसूले जाने के आरोपों को लेकर सोशल मीडिया पर अभियान तेज हुआ है। कई वीडियो, ऑडियो और UPI भुगतान से जुड़े दावे सामने आने के बाद विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

आरोप यह भी है कि कांग्रेस नेता विजय रजक पर कथित ₹1.40 करोड़ की सरकारी बकाया राशि जमा करने की कार्रवाई के बीच सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें और पोस्ट प्रसारित की जा रही हैं, जिनमें आबकारी विभाग की कार्रवाई को दूसरे एंगल से पेश किया जा रहा है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि सोशल मीडिया पर चल रहा यह अभियान वास्तविक MRP शिकायतों का मुद्दा है या कथित सरकारी बकाया की वसूली की कार्रवाई से जुड़ा कोई विवाद?
MRP शिकायतों की जांच भी जरूरी
MRP से अधिक कीमत पर शराब बिक्री के आरोप गंभीर हैं। यदि जांच में शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित दुकानों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, ऑडियो और UPI भुगतान के दावों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
दूसरी ओर, सिंधी कैंप शराब दुकान की पुनर्नीलामी, कथित ₹1.40 करोड़ के सरकारी बकाया और उसकी वसूली की वास्तविक स्थिति भी आबकारी विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होनी चाहिए।
बड़ा सवाल यही है -
क्या जबलपुर में यह सिर्फ MRP की लड़ाई है, या ₹1.40 करोड़ की कथित सरकारी वसूली ने पूरे विवाद को एक नया राजनीतिक रंग दे दिया है? फिलहाल दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।