Edited By Himansh sharma, Updated: 05 Apr, 2026 05:02 PM

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में इन दिनों पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस को लेकर अजीब स्थिति बन गई है।
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में इन दिनों पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस को लेकर अजीब स्थिति बन गई है। अमेरिका-ईरान तनाव की खबरों और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों ने लोगों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है। “तेल खत्म हो जाएगा” जैसी चर्चाओं के चलते लोग पेट्रोल-डीजल स्टोर करने में जुट गए, जिससे रोजाना करीब 50 हजार लीटर अतिरिक्त खपत दर्ज की गई। हालांकि हकीकत इससे अलग है—जिले के 217 पेट्रोल पंपों पर अभी भी 5 से 6 दिन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
लेकिन दूसरी ओर घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर हालात वाकई चिंताजनक होते जा रहे हैं। जिले में करीब 50 हजार उपभोक्ता सिलेंडर के इंतजार में हैं, जबकि एजेंसियां रोजाना सिर्फ 10 हजार सिलेंडर ही डिलीवर कर पा रही हैं। इस बीच कई जगहों पर गड़बड़ी और लापरवाही के मामले भी सामने आए हैं—उपभोक्ताओं के खातों में सब्सिडी तो पहुंच गई, लेकिन सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला आपूर्ति विभाग की टीम ने सिटी के प्रमुख गैस एजेंसियों में जांच शुरू कर दी है। खासतौर पर प्लाजा स्थित एक एजेंसी को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें मिलीं, जहां रिकॉर्ड में सैकड़ों सिलेंडरों का हिसाब गड़बड़ पाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इसी बीच प्रशासन ने एक बड़ा फैसला भी लिया है। जिन इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को 3 महीने के भीतर PNG कनेक्शन लेना अनिवार्य किया जा रहा है। निर्धारित समय सीमा के बाद ऐसे उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। सिटी सेंटर स्थित मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स में इसके लिए विशेष शिविर भी लगाए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि संकट का फायदा उठाकर कुछ एजेंसियों पर ब्लैक मार्केटिंग के आरोप भी लगे हैं। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि बुकिंग के बाद 15-20 दिन तक सिलेंडर नहीं मिला, जबकि रिकॉर्ड में डिलीवरी दिखा दी गई। अब गैस कंपनियों ने एजेंसियों से पूरा हिसाब मांग लिया है।
कुल मिलाकर, जहां एक तरफ अफवाहों ने हालात को और बिगाड़ा, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम की खामियों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और नए नियम इस संकट को कितना कम कर पाएंगे, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।