महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी का बड़ा बयान, बोले- मनरेगा से बापू का नाम हटाना संघ सरकार की फितरत, यह निंदनीय कृत्य

Edited By meena, Updated: 12 Jan, 2026 04:12 PM

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सूर्यपुत्री ताप्ती नगरी मुलताई में महात्मा गांधी के वंशज और कस्तूरबा गांधी के परपोते तुषार गांधी का आगमन हुआ...

बैतूल (रामकिशोर पवार) : सूर्यपुत्री ताप्ती नगरी मुलताई में महात्मा गांधी के वंशज और कस्तूरबा गांधी के परपोते तुषार गांधी का आगमन हुआ। इस दौरान उन्होंने पंजाब केसरी के संवाददाता रामकिशोर पवार से विशेष चर्चा में केंद्र सरकार, मनरेगा कानून, गांधी जी की विरासत और संघ-भाजपा की विचारधारा को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। तुषार गांधी ने कहा कि सरकार ने महात्मा गांधी का नाम हटाने के उद्देश्य से मनरेगा कानून में परिवर्तन कर उसका नाम बदल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाम हटाने का विरोध नहीं है, असल चिंता यह है कि यह कानून समाज के सबसे कमजोर तबके के लिए पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लाया गया था, लेकिन अब संशोधन के नाम पर ऐसी-ऐसी शर्तें जोड़ दी गई हैं, जिनके कारण एक बड़ा वर्ग इसके लाभ से वंचित हो जाएगा। उन्होंने इसे सरकार का निंदनीय कृत्य बताया।

संघ और भाजपा की फितरत में है बापू का विरोध

तुषार गांधी ने कहा कि बापू का नाम हटाना इस सरकार की फितरत है, क्योंकि यह संघ की सरकार है। संघ ने हमेशा महात्मा गांधी के जीवनकाल में उनके खिलाफ द्वेष का प्रचार किया और उनकी हत्या के बाद भी हत्या को जायज ठहराने के लिए दुष्प्रचार करते रहे। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार गांधी जी का नाम जन्म स्मृति और योजनाओं से हटाने का प्रयास करती रही है।

भाजपा के एक केंद्रीय मंत्री द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फादर ऑफ नेशन के रूप में प्रचारित करने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तुषार गांधी ने कहा कि जो लोग खुशामदी में राजनीति करते हैं, उनके लिए ऐसा कहना मजबूरी होती है। उन्हें अपनी हैसियत दिखाकर रखनी होती है, और इसी को चमचागिरी कहा जाता है।

आरएसएस को कैंसर कहे जाने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि जिस कैंसर का इलाज नहीं होता, वही सबसे खतरनाक होता है और आज वही स्थिति बनती जा रही है। इसलिए जरूरी है कि इस बीमारी को समझा जाए और उस अभिअंग को ही काटकर हटा दिया जाए, ऐसी आवश्यकता आ गई है।

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गांधी के विचार आज पहले से ज्यादा ताकतवर

गांधी जी की संपत्तियों को लेकर पूछे गए सवाल पर तुषार गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी की कोई निजी संपत्ति नहीं थी। उनकी असली संपत्ति उनका नाम और उनकी धरोहर है, जो हमें विरासत में मिली है। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की संपत्ति का मोह नहीं है।

स्मारकों और योजनाओं से गांधी जी का नाम हटाने के प्रयासों के पीछे की वजह पर उन्होंने कहा कि जिंदा रहते महात्मा गांधी उन लोगों के लिए सिरदर्द थे, लेकिन आज उनके विचार और उनकी धरोहर पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर हैं। इसी कारण उनके नाम और विचारों को इतिहास और लोगों की स्मृति से मिटाने की कोशिशें की जा रही हैं।

आश्रम परिवार एक

गांधी परिवार के राजनीतिक रूप से एक होने के सवाल पर तुषार गांधी ने कहा कि वंशज के रूप में राहुल गांधी और वरुण गांधी का आपसी रिश्ता उनका निजी मामला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आश्रम परिवार हमेशा एक है।

कस्तूरबा गांधी के लगभग वर्ष 1922 में बैतूल आने और धनोरा गांव से जुड़े सवाल पर तुषार गांधी ने कहा कि पूरे परिवार के बारे में तो वह नहीं कह सकते, लेकिन वह स्वयं जरूर धनोरा गांव आएंगे। उन्होंने कहा कि जहां कस्तूरबा गांधी के चरण पड़े थे, वहां पहुंचकर वह नमन करेंगे और श्रद्धा व्यक्त करेंगे।

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