Edited By Himansh sharma, Updated: 14 Sep, 2026 07:38 PM

मध्य प्रदेश में हाईकोर्ट ने कोर्ट के आदेश के पालन में कथित लापरवाही बरतने के मामले में दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
जबलपुर। मध्य प्रदेश में हाईकोर्ट ने कोर्ट के आदेश के पालन में कथित लापरवाही बरतने के मामले में दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल और तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अदालत ने दोनों अधिकारियों को 21 सितंबर 2026 को कोर्ट के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला सागर कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ अनुभाग अधिकारी शीला सेन के नियमितीकरण से संबंधित है। अदालत ने पहले उनके नियमितीकरण के दावे पर निर्धारित समय सीमा में फैसला लेने का निर्देश दिया था, लेकिन समय बीत जाने के बाद भी कोर्ट के आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इसी को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह कार्रवाई की।
90 दिन में फैसला लेने का था निर्देश
मामले में हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2025 को राज्य सरकार और सागर कलेक्टर को निर्देश दिया था कि शीला सेन के नियमितीकरण के दावे पर 90 दिन के भीतर विचार कर उचित निर्णय लिया जाए। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद जब आदेश के पालन की जानकारी अदालत के सामने नहीं आई, तो याचिकाकर्ता की ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई।
अदालत के समक्ष यह भी सामने आया कि संबंधित अधिकारियों को अवमानना प्रकरण में नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके थे। इसके बावजूद कोर्ट के निर्देश के अनुरूप न तो प्रभावी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और न ही अधिकारियों की ओर से अदालत में उपस्थिति दर्ज कराई गई।
संपर्क अधिकारी की नियुक्ति को कोर्ट ने नहीं माना पर्याप्त
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि सागर कलेक्टर की ओर से दिसंबर 2025 में रजिस्ट्री को एक पत्र भेजकर एक तहसीलदार को संपर्क अधिकारी नियुक्त किए जाने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे मूल आदेश के पालन के लिए पर्याप्त नहीं माना।
अदालत का कहना था कि केवल किसी अधिकारी को संपर्क अधिकारी नियुक्त कर देना उस आदेश का अनुपालन नहीं माना जा सकता, जिसमें संबंधित कर्मचारी के नियमितीकरण के दावे पर निर्धारित समय में निर्णय लेने के निर्देश दिए गए थे।
अधिकारियों के रवैये पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने माना कि निर्धारित समयसीमा में आदेश का पालन नहीं किया गया और इसके बाद भी अनुपालन संबंधी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष नहीं रखी गई।
अवमानना की कार्यवाही में अधिकारियों की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाए जाने को देखते हुए कोर्ट ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया। साथ ही संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि दोनों को अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष पेश किया जाए।
भोपाल कमिश्नर और सागर SP को जिम्मेदारी
हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक गिरफ्तारी वारंट की तामील कराने की जिम्मेदारी भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर एसपी को दी गई है। दोनों अधिकारियों को 21 सितंबर 2026 को कोर्ट में प्रस्तुत किया जाना है।
अब अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि पूर्व में दिए गए आदेश का अनुपालन किस स्तर तक हुआ है और अवमानना के मामले में आगे क्या कार्रवाई की जानी है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कविता गुप्ता और विद्या प्रसाद ने पक्ष रखा। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश के अनुपालन में कथित देरी को गंभीरता से लेते हुए सीधे अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में कार्रवाई की है।