Edited By Himansh sharma, Updated: 29 Aug, 2026 01:32 PM

मध्य प्रदेश के धार जिले से सांप और इंसानी आस्था से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है
धार। मध्य प्रदेश के धार जिले से सांप और इंसानी आस्था से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में कौतूहल पैदा कर दिया है। गंधवानी क्षेत्र के साली गांव में एक नागिन पिछले करीब 12 दिनों से लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई थी। ग्रामीणों का दावा है कि वन विभाग द्वारा जंगल में छोड़े जाने के बाद भी वह दोबारा उसी इलाके में लौट आई।नागिन को लेकर गांव में आस्था का माहौल ऐसा बना कि बड़ी संख्या में लोग उसे देखने और पूजा करने पहुंचने लगे। कुछ ग्रामीणों ने उसे भगवान भीलट देव का स्वरूप मान लिया। दावा किया गया कि नागिन लोगों के बीच मौजूद रहने के बावजूद किसी पर हमला नहीं कर रही थी। इसी वजह से लोगों का उसके प्रति डर कम होता गया और कई लोग उसके बेहद करीब तक पहुंचने लगे।
चम्मच से पानी और दूध पिलाने का दावा
साली गांव में नागिन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा उसके कथित व्यवहार की हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, लोग उसे चम्मच के जरिए पानी और दूध पिला रहे थे। कुछ लोगों के तो नागिन के फन के बेहद करीब पहुंचकर उसे हाथ लगाने और सहलाने के वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, सांप का शांत नजर आना उसके सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है। कोबरा प्रजाति का सांप बेहद जहरीला होता है और अचानक खतरा महसूस होने पर वह हमला कर सकता है। ऐसे में वन्यजीवों के साथ इस तरह नजदीकी बनाना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।
देखते ही देखते पूजा का केंद्र बन गया स्थान
ग्रामीणों के मुताबिक नागिन लंबे समय तक एक सीमित इलाके में दिखाई देती रही। वह आसपास करीब 20 से 30 फीट के दायरे में घूमती थी। जैसे-जैसे इसकी जानकारी ग्रामीणों में फैली, मौके पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। महिलाएं, पुरुष और बच्चे नागिन को देखने पहुंचने लगे। कई लोगों ने वहां पूजा-पाठ शुरू कर दिया। कुछ ही समय में सड़क किनारे का वह स्थान स्थानीय लोगों के लिए आस्था का केंद्र बन गया।
भीलट देव से जोड़ रहे ग्रामीण
नागिन के दोबारा उसी स्थान पर लौटने की घटना को ग्रामीण भगवान भीलट देव से जोड़कर देख रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि नागिन का इस तरह वापस आना सामान्य घटना नहीं है। इसी आस्था के चलते मौके पर टेंट लगाकर पूजा-पाठ किए जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने यहां मंदिर निर्माण की तैयारी भी शुरू कर दी। इसके लिए लोहे के सरिए और अन्य निर्माण सामग्री जुटाए जाने की जानकारी सामने आई है।
दो दिन तक रेस्क्यू को लेकर बनी रही स्थिति
नागिन को देखने के लिए लगातार जुट रही भीड़ को देखते हुए पुलिस और वन विभाग की चिंता बढ़ गई। अधिकारियों ने लोगों को समझाया कि जहरीले सांप के आसपास इस तरह जमा होना किसी भी समय बड़ी घटना का कारण बन सकता है। वन विभाग नागिन को दोबारा सुरक्षित जंगल में छोड़ना चाहता था, लेकिन ग्रामीण इसके लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि नागिन ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है और वे उसे देवता का स्वरूप मानते हैं। करीब दो दिन तक ग्रामीणों और प्रशासन के बीच समझाइश का दौर चला। आखिरकार लोगों को खतरे की गंभीरता समझाई गई और रेस्क्यू के लिए सहमति बनी।
दूसरी बार किया गया रेस्क्यू
सहमति मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने नागिन को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। इसके बाद उसे वाहन से आबादी वाले क्षेत्र से दूर ले जाकर जंगल में छोड़ दिया गया। अब इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों के बीच एक ही सवाल चर्चा में है..जंगल में छोड़े जाने के बाद नागिन वापस उसी इलाके में क्यों पहुंची? ग्रामीण इसे आस्था और चमत्कार से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं, वन्यजीव विशेषज्ञों के नजरिए से किसी सांप का किसी स्थान पर बार-बार दिखाई देना उसके प्राकृतिक व्यवहार, भोजन, आश्रय या उस इलाके से उसके परिचित होने जैसे कारणों से भी जुड़ा हो सकता है। फिलहाल साली गांव की यह नागिन आस्था, कौतूहल और वन्यजीव सुरक्षा के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।