Edited By Desh Raj, Updated: 27 Mar, 2026 05:45 PM

प्रमोशन कर्मचारियों का मौलिक अधिकार नहीं हैं,जी हां, इसको लेकर एक अहम फैसला आया है। दरअसल छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला देते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी को पदोन्नति (Promotion) प्राप्त करना मौलिक अधिकार नहीं है।
(बिलासपुर): प्रमोशन कर्मचारियों का मौलिक अधिकार नहीं हैं,जी हां, इसको लेकर एक अहम फैसला आया है। दरअसल छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला देते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी को पदोन्नति (Promotion) प्राप्त करना मौलिक अधिकार नहीं है। इसके साथ ही पदोन्नति नियमों को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया।
क्या था मामले को लेकर विवाद
आपको मामले की जानकारी दे देते हैं। दरअसल मुख्य नगरपालिका अधिकारी पद पर पदोन्नत अधिकारियों ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं और कहा था कि वे सिविल पदों पर कार्यरत अफसर हैं, जबकि राजस्व निरीक्षक केवल नगरपालिका का सेवक हैं। इसिलए दो अलग-अलग वैधानिक श्रेणियों को एक समान मानकर प्रमोशन देना संविधान के के तहत मिले समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
कोर्ट ने प्रमोशन को सरकार का नीतिगत अधिकार माना
जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि पदोन्नति के लिए एक से अधिक फीडर कैडर तय करने के साथ ही विभिन्न पदों की समकक्षता निर्धारित करना पूरी तरह सरकार और कार्यपालिका के नीतिगत दायरे में आता है। बेंच से साफ किया कि किसी कर्मचारी का प्रमोशन पाने का अधिकार केवल निहित अधिकार नहीं होता, निर्धारित नियमों के अनुसार ही प्रमोशन के लिए विचार करने का अधिकार होता है।
बता दें कि इस मामले में पहले हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने इन प्रावधानों को अवैध घोषित कर दिया था, इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद पुराने आदेश को निरस्त करके केस को नए सिरे से सुनवाई के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट भेजा था।
लिहाजा जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिविजन बेंच ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) पदोन्नति नियमों को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ये साबित करने में असफल रहे कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है या फिर कोई नियम असंवैधानिक हैं। लिहाजा ये फैसला काफी अहम और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।