Edited By meena, Updated: 30 Apr, 2026 06:27 PM

भाजपा जो शासन-अनुशासन का दावा करती है और खुद को सबसे अनुशासित कार्यकर्ताओं की पार्टी कहती है। हो सकता है कि पार्टी ने अनुशासनहीनता पर कई बार ऐसे सख्त एक्शन लिए हो...
भोपाल : भाजपा जो शासन-अनुशासन का दावा करती है और खुद को सबसे अनुशासित कार्यकर्ताओं की पार्टी कहती है। हो सकता है कि पार्टी ने अनुशासनहीनता पर कई बार ऐसे सख्त एक्शन लिए हो, लेकिन अब लगता है कि समय के साथ साथ पार्टी ने शासन अनुशासन की परिभाषा बदल दी है। ताजा उदाहरण हाल ही में हुई मध्य प्रदेश की राजनीतिक नियुक्तियां है। जिसमें पन्ना के नेता संजय नगायच जो पार्टी से दो से तीन बार निष्कासित हो चुके हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष बनाया है। बुधवार को नगाइच ने अपने शक्ति प्रदर्शन करते हुए पदभार ग्रहण किया।
उठे सवाल
संजय नगायच जिनपर पिछले डेढ़ दशक में भाजपा के प्रदेशाध्यक्षों ने पार्टी विरोधी गतिविधियों, चुनाव में बगावत और अनुशासन हीनता के आरोप में पार्टी से निलंबित और निष्कासित किया था। जानकारी के मुताबिक, संजय नगायच पर पन्ना जिला सहकारिता बैंक में ऋण घोटाले से जुड़े एक मामले में EOW में भ्रष्टाचार का केस चल रहा है, जिसकी अभियोजन स्वीकृति की फाइल सरकार के पास ही लंबित हैं। इसके अलावा संजय के खिलाफ 420 के केस समेत विभिन्न धाराओं के तहत पन्ना जिले के तीन थानों पवई, अमानगंज, शाहनगर में अलग अलग मामले दर्ज हैं। जिनमें पुलिस चालान की कार्यवाही लंबित हैं।
अनुशासनहीनता में निष्कासित, जानें कब कब हुई कार्रवाई
संजय नगायच पर सबसे पहली कार्रवाई 3 जनवरी 2009 को हुई थी। तब तत्कालिन भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने वर्ष 2008 के विस चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के विरोध में काम करने पर पार्टी से निलंबित किया था। इसके बाद 2013 के विस चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर नगायच को नोटिस जारी करने के बाद पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया था। यह कार्रवाई 6 जुलाई 2015 को भाजपा के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष (दिवंगत) नंदकुमार चौहान ने की थी। अब जनता दबी जुबान में सवाल कर रही है कि आखिर पार्टी की ऐसी क्या मजबूरी रही होगी कि दागदार नेता को सरकार में मंत्री पद का दर्ज दे दिया गया।