Edited By Himansh sharma, Updated: 23 Apr, 2026 08:15 AM

मध्य प्रदेश में लंबे समय से लंबित राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अब हलचल तेज हो गई है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में लंबे समय से लंबित राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अब हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) निगम-मंडलों और विभिन्न बोर्डों में नियुक्तियों की तैयारी कर रही है, जिसमें इस बार महिलाओं की भागीदारी को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। पार्टी की रणनीति है कि राजनीतिक नियुक्तियों की सूची में अधिक से अधिक महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाए।
दरअसल, केंद्र स्तर पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक को लेकर बनी राजनीतिक परिस्थितियों के बाद भाजपा महिला मतदाताओं के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखना चाहती है। इसी उद्देश्य से भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं को शासन और प्रशासन में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में काम तेज किया गया है।
मध्य प्रदेश भाजपा भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ रही है। पार्टी न केवल निगम-मंडलों में महिलाओं को जगह देगी, बल्कि प्रदेश कार्यसमिति में भी महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की तैयारी कर रही है। भाजपा का मानना है कि महिलाओं को केवल औपचारिक पद देने के बजाय उन्हें निर्णय लेने वाली भूमिका में लाना जरूरी है, ताकि संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनका प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे।
प्रदेश में पहले से ही महिला प्रतिनिधित्व के मामले में सकारात्मक तस्वीर देखने को मिल रही है। पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जिसका असर भी साफ नजर आता है। वर्तमान में पंचायत राज संस्थाओं में 52 प्रतिशत से अधिक महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में हैं।
राज्य की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में कुल 3 लाख 95 हजार 552 निर्वाचित प्रतिनिधियों में से 2 लाख 9 हजार 41 महिलाएं हैं। 313 जनपद पंचायतों में से 179 का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं, जबकि 52 जिला पंचायतों में भी बड़ी संख्या में महिला अध्यक्ष मौजूद हैं।
नगरीय निकायों की बात करें तो 16 नगर निगमों में से 9 में महिला महापौर हैं। वहीं 7,321 पार्षदों में से 4,154 महिला पार्षद हैं। इन आंकड़ों को भाजपा अपनी राजनीतिक रणनीति के मजबूत आधार के रूप में देख रही है।
अब माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में निगम-मंडलों की नई सूची जारी होने पर कई नए महिला चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। इससे पार्टी महिला सशक्तिकरण का बड़ा संदेश देने की कोशिश करेगी।