Edited By meena, Updated: 23 Jan, 2026 05:29 PM

मध्य प्रदेश के दमोह जिले की पथरिया से बसपा विधायक रही रामबाई को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। प्रदेश के बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में जबलपुर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए उनके पति गोविंद सिंह...
दमोह : मध्य प्रदेश के दमोह जिले की पथरिया से बसपा विधायक रही रामबाई को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। प्रदेश के बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में जबलपुर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए उनके पति गोविंद सिंह परिहार समेत 7 लोगों को उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है, जबकि 18 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया है। उम्रकैद भुगतने वाले आरोपियों में बसपा नेता के पति समेत देवर चंदू सिंह और भाई लोकेश सिंह सहित अन्य शामिल हैं।
इसके साथ ही फरियादी सोमेश चौरसिया द्वारा सजा बढ़ाने की मांग को लेकर दायर अपील को भी हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे की खंडपीठ ने दोषियों की अपील पर सुनवाई के बाद पारित किया।
क्या है देवेंद्र चौरसिया हत्यकांड
करीब 6 साल पहले मध्य प्रदेश में देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड से हड़कंप मच गया था। 15 मार्च 2019 की रात को दमोह जिले के हटा थाना क्षेत्र अंतर्गत पटेरा मार्ग स्थित चौरसिया डामर प्लांट पर कांग्रेस नेता एवं व्यवसायी देवेंद्र चौरसिया पर लाठी-डंडों से हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल देवेंद्र चौरसिया की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
देवेंद्र चौरसिया की हत्या के बाद जमकर सियासत हुई थी। पूर्व विधायक रामबाई के पति के खिलाफ अन्य मामलों में भी केस दर्ज थे। ऐसे में देवेंद्र चौरसिया के बेटे ने आरोपियों को अन्य मामलों में मिली जमानतों को निरस्त कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायक रामबाई के पति गोविंद सिंह और उनके परिजनों को राजेंद्र पाठक हत्याकांड, पाठक परिवार के तिहरे हत्याकांड और सतपारा लूट कांड सहित अन्य मामलों में मिली सभी जमानतों को रद्द कर दिया था। उस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि राज्य सरकार आम आदमी और रसूखदारों के मामलों में कानून के दोहरे मापदंड नहीं अपना सकती।

एक साल पहले 25 आरोपियों को हुई थी उम्रकैद
करीब एक वर्ष पूर्व अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार कौशिक ने मामले में 25 आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए सभी दोषसिद्ध आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर 18 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया जबकि सात दोषियों की सजा को कायम रखने का निर्देश दिया।