दिग्विजय ने CM मोहन से की शिवराज की शिकायत, लगाया ऐसा आरोप, कि हिल जाएगी प्रदेश की सियासत

Edited By Himansh sharma, Updated: 16 Apr, 2026 02:22 PM

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पत्र में दावा किया गया है कि 2017 से 2021 के बीच खरीदे गए गेहूं को समय पर उठाने के बजाय जानबूझकर गोदामों में रोके रखा गया।

भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़ा घोटाला गर्मा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्य में कथित “घुन घोटाले” को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (EOW) से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। दिग्विजय सिंह का आरोप है कि यह पूरा मामला केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र से जुड़ा है, जहां सीहोर और रायसेन जिलों के निजी गोदामों में रखा करीब 40 हजार टन गेहूं सालों तक पड़ा-पड़ा सड़ गया।

किराए के खेल में सड़ाया गया अनाज?

पत्र में दावा किया गया है कि 2017 से 2021 के बीच खरीदे गए गेहूं को समय पर उठाने के बजाय जानबूझकर गोदामों में रोके रखा गया। नियमों के अनुसार 8-10 महीने में उठाया जाने वाला अनाज 5 साल तक वहीं पड़ा रहा। आरोप है कि ऐसा निजी गोदाम मालिकों को मोटा किराया दिलाने के लिए किया गया।

जब गेहूं पूरी तरह खराब हो गया और जांच में फेल हो गया, तो अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए इसे चुपचाप सरकारी वेयरहाउसों में शिफ्ट कर दिया, ताकि नुकसान का ठीकरा सरकारी सिस्टम पर फोड़ा जा सके।

दोहरी मार: अनाज भी गया, पैसा भी बहा

इस कथित घोटाले में सरकारी खजाने को दोहरी चपत लगने की बात कही जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपए का गेहूं पूरी तरह बर्बाद हो गया वहीं, गोदाम किराए और रखरखाव के नाम पर 150 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए गए.. ऊपर से सड़े हुए अनाज के ट्रांसपोर्ट में भी करोड़ों का भुगतान किया गया ।

सांठगांठ और राजनीतिक संरक्षण का आरोप

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में निजी गोदाम मालिकों, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिए कि राजनीतिक संरक्षण के चलते अब तक किसी पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को जेल भेजा जाए और सरकारी पैसे की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।

पुराना मामला, फिर उठा सवाल

गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह इससे पहले भी 25 जुलाई 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले की जांच की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने एक बार फिर इसे उठाया है।

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