Edited By meena, Updated: 02 Nov, 2026 04:14 PM

व्यापारी की ओर से कथित लेनदेन का वीडियो और अधिकारियों से बातचीत की ऑडियो रिकॉडिर्ंग सार्वजनिक किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं...
बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में उत्तर प्रदेश से लाए जा रहे धान से भरे वाहन को छोड़ने के बदले कथित रूप से एक लाख रुपये की रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। वाड्रफनगर के अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) तुलसी राम मरकाम और तहसीलदार अश्विनी चंद्रा पर एक व्यापारी ने रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। व्यापारी की ओर से कथित लेनदेन का वीडियो और अधिकारियों से बातचीत की ऑडियो रिकॉडिर्ंग सार्वजनिक किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
जिला प्रशासन से आज मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बभनी निवासी व्यापारी हरिओम गुप्ता ने आरोप लगाया है कि वह अपने पिकअप वाहन में धान लेकर छत्तीसगढ़ आ रहा था। इस दौरान राज्य की सीमा पर स्थित मंडी बोडर् के बैरियर में उससे शुल्क के नाम पर 1200 रुपये वसूले गए। इसके बाद आरटीओ चेकपोस्ट पर वाहन पहुंचने पर कथित तौर पर 53 हजार रुपये की मांग की गई। व्यापारी के मुताबिक, उसने 50 हजार रुपये देने की सहमति जताई और नकद राशि लाने के लिए बभनी वापस चला गया। इस बीच आरटीओ चेकपोस्ट से वाहन के संबंध में तहसीलदार को जानकारी दे दी गई। व्यापारी का दावा है कि वापस लौटने पर तहसीलदार के कर्मचारी धुर्वे के माध्यम से उससे 50 हजार रुपये लिए गए, हालांकि बाद में यह राशि लौटा दी गई। हरिओम गुप्ता ने आरोप लगाया कि अगले दिन सुबह एसडीएम तुलसी राम मरकाम और तहसीलदार अश्विनी चंद्रा के बीच चर्चा होने के बाद वाहन को छोड़ने के लिए एक लाख रुपये की मांग की गई।
व्यापारी के अनुसार, उसने राजेश यादव नामक व्यक्ति के माध्यम से यह राशि पहुंचाई। आरोप है कि रकम देने के बाद वाहन मुक्त करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन इसके विपरीत पिकअप को थाने में खड़ा करा दिया गया। मामले में व्यापारी ने कथित रिश्वत के लेनदेन से संबंधित एक वीडियो भी सार्वजनिक किया है। उसका दावा है कि वीडियो में एक लाख रुपये की राशि सीधे हाथ में लेने के बजाय मोटरसाइकिल की डिक्की में रखवाई जा रही है। इसके अतिरिक्त व्यापारी ने एसडीएम के साथ हुई कथित बातचीत की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी मीडिया को उपलब्ध कराई है। व्यापारी का कहना है कि बातचीत के दौरान एसडीएम की ओर से वाहन छोड़ने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन चार से पांच दिन बीत जाने के बावजूद वाहन नहीं छोड़ा गया। उसने इस पूरे घटनाक्रम में संबंधित अधिकारियों और राजेश यादव की भूमिका की जांच की मांग की है। इस प्रकरण में राजेश यादव की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि राजेश यादव एसडीएम के गांव के आसपास का निवासी है और पूर्व में जिला पंचायत सदस्य रह चुका है। उसके राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहने की भी चर्चा है। हालांकि इन जानकारियों और कथित लेनदेन में उसकी भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इधर, प्रकरण से संबंधित शिकायत तथा कथित ऑडियो-वीडियो सामने आने के बाद बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कलेक्टर संजय चंदन त्रिपाठी ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर के अनुसार, प्रकरण की जांच कराई जाएगी और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कारर्वाई की जाएगी। इस मामले में एसडीएम तुलसी राम मरकाम, तहसीलदार अश्विनी चंद्रा और राजेश यादव के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच के दौरान कथित रिश्वत लेनदेन की रिकॉर्डिंग, धान परिवहन से संबंधित दस्तावेज, वाहन को थाने में खड़ा कराने की प्रक्रिया तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार है। संबंधित अधिकारियों और अन्य आरोपित व्यक्तियों का पक्ष भी सामने आना शेष है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही आरोपों की वास्तविकता और किसी संभावित प्रशासनिक अथवा कानूनी कारर्वाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।