Edited By Himansh sharma, Updated: 13 Apr, 2026 12:30 PM

शहर की राजस्व व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही सुस्ती और शिकायतों पर आखिरकार प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है।
इंदौर। शहर की राजस्व व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही सुस्ती और शिकायतों पर आखिरकार प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने रविवार को एक झटके में कई तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के तबादले कर पूरे सिस्टम में हलचल मचा दी। इस बदलाव को महज ट्रांसफर नहीं, बल्कि “प्रशासनिक सर्जरी” माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, कई अधिकारी वर्षों से एक ही जगह जमे हुए थे, जिन पर काम में लापरवाही, फाइलें लंबित रखने और मनमानी के आरोप लगते रहे। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया और ऐसे अधिकारियों को सीधे राजस्व न्यायालयों से हटाकर प्रोटोकॉल शाखा में भेज दिया—यानी अब वे सीधे जनता से जुड़े फैसलों से दूर रहेंगे।
वहीं दूसरी ओर, लंबे समय से मौके की तलाश में बैठे अधिकारियों को फील्ड में उतारकर प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि अब काम करने वालों को ही जिम्मेदारी मिलेगी। एसडीएम दीपक चौहान को कनाड़िया और डिप्टी कलेक्टर प्रियंका चौरसिया को खुडैल की कमान सौंपना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
तहसीलों में भी बड़ा फेरबदल किया गया है। जूनी इंदौर, मल्हारगंज, कनाड़िया, राऊ, भिचौली हप्सी, हातोद, खुडैल और देपालपुर में तहसीलदार से लेकर नायब तहसीलदार तक के प्रभार बदले गए हैं। खास बात यह रही कि महू और सांवेर तहसील को इस फेरबदल से दूर रखा गया।
प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई को एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है—अब फाइलें दबाकर बैठने या नियमों से खेल करने वालों के लिए जगह नहीं है। आने वाले दिनों में इसका असर जमीनी स्तर पर दिखने की उम्मीद जताई जा रही है, जहां आम लोगों के काम तेज़ी से निपटने की संभावना बढ़ेगी।