बिना कुछ किए ही मोहन सरकार के हाथ लगा कुबेर का भंडार, इस तरह से मिले करोड़ों रुपये

Edited By Desh Raj, Updated: 23 Feb, 2026 07:17 PM

the debt ridden mohan government has discovered a hidden treasure

मध्य प्रदेश की मोहन सरकार के लिए एक राहत भरी खबर है। दरअसल मोहन सरकार के हाथ ऐसा खजाना लगा है जिसका कोई अता-पता ही नहीं था। इस खजाने के पता लगते ही जहां सरकार कुछ राहत महसूस कर रही है वहीं वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठ रहे हैं। दरअसल ये पैसा ऐसे समय...

(भोपाल): मध्य प्रदेश की मोहन सरकार के लिए एक राहत भरी खबर है। दरअसल मोहन सरकार के हाथ ऐसा खजाना लगा है जिसका कोई अता-पता ही नहीं था। इस खजाने के पता लगते ही जहां सरकार कुछ राहत महसूस कर रही है वहीं वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठ रहे हैं। दरअसल ये पैसा ऐसे समय में मिला है जब सरकार पहले ही आर्थिक बोझ और कर्ज का सामना कर रही है। दरअसल सरकार को 1.28 लाख बंद पड़े खातों में करीब 2.44 करोड़ रुपए मिले हैं । अलग-अलग योजनाओं से जुड़े इन पैसों को ऐसे खातों में डाला गया था जो एक्टिवेट ही नहीं है।

बजट संतुलन और लगातार बढ़ते कर्ज के बीच मोहन  सरकार को अपने ही सिस्टम में मिले इस पैसै से राहत मिल सकती है।   दरअसल वित्तीय समीक्षा के दौरान अलग-अलग योजनाओं से जुड़े करीब 1 लाख 28 हजार सरकारी खातों में 244 करोड़ रुपये जमा होना पाए गए हैं।  ये लाखों खाते ऐसे थे जो एक्टिवेट ही नहीं थे। ये  पैसे सालों से उपयोग में ही नहीं लाए गए थे और फाइलों के बीच दफन हो गए थे।

कैसे नजर में आए ये खाते?

दरअसल जब एमपी वित्त विभाग की रूटीन स्क्रूटनी में पुराने बैंक खातों का मिलान शुरू हुआ तब इस पैसे का पता चला और सभी को होश फाख्ता हो गए।  इन डॉर्मेंट खातों के सामने आने से हर कोई हैरान है। कई खाते उन योजनाओं से जुड़े थे, जिनका काम पूरा हो चुका था।  जैसे जैसे समय बीतत गया वैसे-वैसे ये खाते सक्रिय ट्रैकिंग से बाहर हो गए, लेकिन इतना बड़ा अमाउंट इनमें छिपा रहा ।

इस पैसे का अब क्या होगा?

जानकारी के मुताबिक विभाग ने संबंधित बैंकों और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) के साथ आगे की प्रक्रिया पर काम करना चालू कर दिया है। नियमों के तहत इन खातों में जमा राशि को राज्य के कोष में वापस लाया जाएगा

सरकारी निगरानी तंत्र पर उठ रहे सवाल

बेशक सरकार को इस तरह से  244 करोड़ रुपए मिलें हो लेकिन ये बड़ा सवाल भी खड़ा कर रहे हैं।सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर खाते निगरानी से बाहर कैसे हो सकते हैं? ये मामला सरकारी वित्तीय प्रबंधन की कमी को भी दर्शाता है। लिहाजा सरकार को  इस समय आर्थिक मोर्चे पर जूझते हुए   244 करोड़ रुपये मिलना थोड़ी राहत दे सकता है।

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