Edited By Vandana Khosla, Updated: 21 Apr, 2026 09:36 AM

एमपी डेस्क: एमपी के विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित को विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) वापस लेने की अनुमति दे दी। साथ ही संबंधित मामले में अब...
एमपी डेस्क: एमपी के विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित को विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) वापस लेने की अनुमति दे दी। साथ ही संबंधित मामले में अब हाईकोर्ट में भेजा गया। बता दें कि याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित ने जांच सहित कई मांगों पर विचार न होने के कारण सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी।
दरअसल, जबलपुर हाईकोर्ट में चल रहे आपराधिक अवमानना मामले में विधायक संजय पाठक ने हलफनामा देकर अपनी गलती मान ली है और बिना शर्त माफी मांग ली है। सुनवाई के दौरान उनके वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि आपराधिक अवमानना में सजा तभी दी जाती है, जब गलती बहुत गंभीर हो या व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार न करे। उन्होंने बताया कि संजय पाठक ने अपनी गलती मान ली है। इस पर हाईकोर्ट ने उनका हलफनामा रिकॉर्ड में शामिल कर लिया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के लिए बुलाया है। मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को तय की गई थी।
आशुतोष दीक्षित की ओर से कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि विधायक संजय पाठक से संबंधित कंपनी के विरुद्ध अवैध उत्खनन के मामले में जस्टिस विशाल मिश्रा ने एक सितंबर 2025 को सुनवाई से इनकार कर दिया था। आरोप है कि संजय पाठक ने मामले की सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट जज को सीधा फोन किया था। जिसके बाद संबंधित जज सुनवाई से हट गए।
मामले में हाईकोर्ट ने विधायक संजय पाठक पर आपराधिक अवमानना केस चलाने के आदेश दिए हैं। बता दें कि विधायक संजय पाठक से जुड़ीं पारिवारिक फर्मों पर अनुमति से अधिक खनन के आरोप हैं। इन फर्मों पर 443 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। वहीं, हाईकोर्ट में आपराधिक अवमानना और अन्य मांगों पर विचार न होने पर आशुतोष दीक्षित ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। इसपर सुनवाई के बाद शीर्ष कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया। शीर्ष कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एसएलपी वापिस लेने की अनुमति दी। इसी के साथ ही कहा कि विधायक संजय पाठक के खिलाफ दर्ज आपराधिक अवमानना के प्रकरण में हाईकोर्ट की मदद कर सकता है।