समाली दहारा का रहस्य.. जहां कभी नहीं सूखता पानी, कहते हैं यहां छिपा है राजा का खजाना… क्या है सच?

Edited By Himansh sharma, Updated: 13 Mar, 2026 12:24 PM

the untold mystery of samali dahara and the legend of a hidden treasure

छत्तीसगढ़ के धमधा क्षेत्र में इतिहास, लोककथाओं और रहस्यों से जुड़ी कई कहानियां आज भी बुजुर्गों की जुबान पर जिंदा हैं।

धमधा (हेमंत पाल): छत्तीसगढ़ के धमधा क्षेत्र में इतिहास, लोककथाओं और रहस्यों से जुड़ी कई कहानियां आज भी बुजुर्गों की जुबान पर जिंदा हैं। इन्हीं में से एक रहस्यमयी स्थान है समाली दहारा, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां सदियों पुराना खजाना छिपा है और आज तक उसका रहस्य पूरी तरह खुल नहीं पाया है।

 जब धमधा था तालाबों की नगरी

इतिहासकारों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार 13वीं-14वीं शताब्दी के दौरान धमधा क्षेत्र में गोर्ड (गोंड) राजाओं का शासन हुआ करता था। उस समय राजा ने अपने किले और नगर की सुरक्षा के लिए किले के चारों ओर कई बड़े तालाब खुदवाए थे। कहा जाता है कि यहां छह बड़े तालाब और कई छोटी कोरी (कुंडनुमा जलस्रोत) बनवाए गए थे। इसी वजह से धमधा को उस दौर में “तालाबों की नगरी” भी कहा जाता था। लेकिन इन तालाबों और किले से भी ज्यादा चर्चा जिस रहस्य की होती है, वह है समाली दहारा का खजाना।

PunjabKesariखजाने को छुपाने की योजना

लोककथाओं के अनुसार उस समय के राजा के पास हीरे, मोती, सोना-चांदी और कीमती आभूषणों का विशाल खजाना था। युद्ध और लूट के डर से राजा ने अपने मंत्री को आदेश दिया कि ऐसा स्थान ढूंढा जाए जहां खजाना सुरक्षित छुपाया जा सके। मंत्री ने कई जगहों की खोज के बाद एक जगह का सुझाव दिया धमधा के पश्चिम में स्थित गाड़ाघाट, जो आमने नदी के किनारे बसा हुआ क्षेत्र है।
यहीं नदी के एक बेहद गहरे हिस्से में राजा ने खजाने की पोटली को छुपा दिया। यही स्थान आगे चलकर समाली दहारा के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

रहस्य: कभी नहीं सूखता पानी

स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि आमने नदी का पानी गर्मियों में कई जगह सूख जाता है। लेकिन समाली दहारा का पानी आज तक कभी पूरी तरह नहीं सूखा। लोगों का मानना है कि जिस स्थान पर खजाना छिपाया गया था, वही हिस्सा असाधारण रूप से गहरा है और उसी वजह से वहां पानी हमेशा बना रहता है।

सुराहीन गाय का रहस्य

इस जगह से जुड़ी एक और रहस्यमयी मान्यता है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार रात या सुबह के समय यहां सुराहीन गौ माता दिखाई देती है। कुछ लोग कहते हैं कि यह दिव्य संकेत है, जबकि कुछ लोग मानते हैं कि यह खजाने की रक्षा करने वाली अलौकिक शक्ति का प्रतीक है। हालांकि आज तक किसी ने इस रहस्य को पूरी तरह समझ नहीं पाया।

यहां था भगवान कृष्ण का मंदिर?

कई बुजुर्गों का यह भी दावा है कि पुराने समय में इसी स्थान पर भगवान कृष्ण का एक प्राचीन मंदिर हुआ करता था। समय के साथ वह मंदिर नदी में समा गया और अब उसका कोई स्पष्ट अवशेष दिखाई नहीं देता। लेकिन स्थानीय लोग आज भी उस स्थान को पवित्र मानते हैं।

PunjabKesariनवरात्रि में बढ़ जाती है आस्था

समाली दहारा के पास ही मां शीतला का मंदिर स्थित है। चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और ज्योति कलश स्थापित करते हैं। लोगों की मान्यता है कि यहां आने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

रहस्य जानने पहुंची ग्राउंड रिपोर्ट टीम

जब इस रहस्यमयी स्थान के बारे में चर्चा बढ़ी तो मीडिया की टीमें भी वहां पहुंचीं। स्थानीय लोगों से बातचीत, नदी की गहराई और आसपास के इतिहास को जानने की कोशिश की गई। आज भी समाली दहारा ऐसा रहस्य बना हुआ है जिसके बारे में लोग अलग-अलग कहानियां सुनाते हैं.. किसी के लिए यह राजा के खजाने की कहानी है,तो किसी के लिए आस्था और चमत्कार का स्थान।

समाली दहारा आज भी इतिहास, लोककथा और रहस्य का ऐसा संगम है, जिसे देखने और समझने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

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