Edited By meena, Updated: 10 Apr, 2026 05:39 PM

छतरपुर में केन बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित न्याय की मांग कर रहे आदिवासियों और किसानों का धैर्य आज जवाब दे गया। केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ चल रहे 'चिता आंदोलन' के दूसरे दिन हालात उस समय...
छतरपुर (राजेश चौरसिया) : छतरपुर में केन बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित न्याय की मांग कर रहे आदिवासियों और किसानों का धैर्य आज जवाब दे गया। केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ चल रहे 'चिता आंदोलन' के दूसरे दिन हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब पुलिस प्रशासन ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का राशन-पानी रोकने की कोशिश की।
प्रशासन की इस दमनकारी कार्रवाई से हजारों आदिवासी महिलाएं और किसान भड़क उठे। आक्रोशित जनता के भारी विरोध के सामने प्रशासन को पीछे हटना पड़ा और आंदोलन स्थल से दौड़ लगानी पड़ी। स्थिति को बिगड़ते देख सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने मोर्चा संभाला और बमुश्किल ग्रामीणों को शांत कराया।
अमित भटनागर ने प्रशासन को दो-टूक चेतावनी देते हुए कहा कि आदिवासियों के हक की यह लड़ाई अब 'जन संघर्ष' बन चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आंदोलन को कुचलने या दमन करने की कोशिश की गई, तो इसके परिणाम और भी उग्र होंगे। जब तक विस्थापितों को पूर्ण न्याय नहीं मिलता, यह चिता आंदोलन थमेगा नहीं।
केंद्र सरकार की केन-बेतवा लिंक परियोजना को कुप्रबंधन के चलते पलीता लगता नजर आ रहा है। यहां के विस्थापित मुआवजा राशि वितरण में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। पटवारी रिश्वतकांड ने घूसखोरी के आरोपों को साबित भी किया है। वहीं जब प्रशासनिक अधिकारियों को जिस तरीके से ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा और जूता-चप्पल छोड़कर भागना पड़ा, वह बताता है कि मुआवजा वितरण में कुछ न कुछ तो दाल में काला है लोगों में जिसका गुस्सा आंदोलन के रूप में फूट रहा है।

दिल्ली जाते समय रोका तो बांध पर ही बैठे
दरअसल केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी किसान जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार द्वारा सुनवाई कोई कारगर कदम न उठाएं जाने के चलते प्रधानमंत्री से मिलने पैदल ही दिल्ली जाने निकले थे जिन्हें प्रशासन ने रास्ते में ही रोक दिया था और उन्होंने जो घर-घर से एक-एक कटोरा आटा, दाल, चावल, राशन एकत्रित किया था जिसे वे साथ लेकर चल/जा रहे थे उसे भी छीन लिया था। जिस पर प्रभावितों आदिवासी किसानों ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुख्य डोधन बांध पर ही डेरा जमा लिया और आंदोलन शुरू कर दिया बावजूद देश के जब प्रशासन नहीं चिता तो उन्होंने चीता आंदोलन शुरू कर दिया जहां वे धोरण बंद पर ही चिता बनाकर जिंदा ही लेट गए चिंता आंदोलन का गुरुवार को दूसरा दिन था।
राशन पानी किया बंद
आंदोलनकारी का आरोप है कि प्रशासन ने उनका राशन पानी तो पहले ही छीन लिया था अब वह राशन पानी की व्यवस्था कर रहे हैं तो उसे आने से रोका जा रहा है उनका आरोप है कि प्रशासन चाहता है कि उनके पास राशन पानी न पहुंचे तो यह अपने आप ही स्वत भूख मारने की कगार पर आ जाएंगे और आंदोलन छोड़कर चले जाएंगे।
प्रशासन के आरोप
वहीं प्रशासन का आरोप है कि अमित भटनागर ने भोली भाली जनता को बरगलाकर जिला प्रशासन की टीम पर हमला कराने की योजना बनाई थी। अधिकारी ग्रामीणों, महिलाओं एवं बच्चों की समस्याएं सुनने एवं स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी के लिए पहुंचे थे। जिला प्रशासन के अधिकारियों को 5 घंटे के इंतजार के बाद बेरंग बापस लौटना पड़ा। प्रशासन का आरोप है कि 600 से 700 लोगों का पूरा हुजूम हुआ हमलावर, जिसमें लगभग 500 लोग पन्ना जिले के शामिल हैं।

बगैर अनुमति आंदोलन के आरोप
प्रशासन के मुताबिक केन बेतवा लिंक परियोजना भारत की नदी जोड़ो महत्वाकांक्षी योजना है। जिसका निर्माण कार्य चल रहा है। परंतु विगत तीन दिनों से अमित भटनागर द्वारा बगैर अनुमति के पन्ना जिले की भोली भाली जनता को भड़काकर एवं बरगलाकर धरना एवं विरोध प्रदर्शन कराकर निर्माण कार्य बंद कराया गया है।
गुरुवार को पहुंची थी टीम
जब गुरुवार को जिला प्रशासन की टीम जिला पंचायत सीईओ एवं अपर कलेक्टर नमः शिवाय अरजरिया के साथ लोगों की समस्याएं सुनने पहुंची तो टीम को प्रातः 11 बजे से 4 बजे शाम तक इंतजार कराया गया और फिर अचानक कई लोगों के एक बड़े हुजुम ने प्रशासन की टीम पर हमला करने की कोशिश और अधिकारियों को वहां से बेरंग वापस लौटना पड़ा।
बैरंग लौटे अधिकारी
प्रशासन की टीम का कहना है बांध का कार्य निरंतर चालू रहे, जिसे शुरू कराया जा सके एवं भोलेभाले जनजातीय वर्ग के ग्रामीणों, महिलाओं एवं बच्चों को किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या जैसे डायरिया आदि बीमारी न हो, क्योंकि नदी का पानी पास में हैं और न ही किसी प्रकार की दिक्कत हो। इसी समस्याओं के समाधान के तारतम्य में प्रशासन की संयुक्त टीम पहुंची थी। परंतु अमित भटनागर के नेतृत्व में जिसके साथ ही करीब 500 लोग पन्ना जिले के थे। जिनका छतरपुर जिले से कोई संबंध नहीं है। इसी भीड़ का पूरा हुजूम हमला करने की सोची समझी योजना के साथ एकत्रित हुआ और प्रशासनिक कार्य में बाधा डालते हुए अधिकारियों की टीम के ऊपर उमड़ पड़ा। जिस कारण अधिकारियों को वापस बेरंग लौटना पड़ा। बता दें कि जिला मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 163 भी उपयुक्त सम्पूर्ण क्षेत्र में लागू की गई है।